कर्नाटक के दावों के आधार बनी परीक्षण पद्धति पर सवाल उठाए
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों का E20 पेट्रोल भारतीय मानक IS 17021 के अनुरूप है। 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लिए गए सभी 893 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे उतरे। इनमें कर्नाटक के 56 नमूने शामिल हैं।
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले एवं विधिक मापविज्ञान विभाग की प्रेस विज्ञप्ति का संज्ञान लिया है। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर बेचे गए पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 26 से 31 प्रतिशत के बीच पाई गई।
तीनों कंपनियाँ स्पष्ट करती हैं कि प्रकाशित दावों की पुष्टि निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुसार किए गए परीक्षणों से नहीं होती है। कर्नाटक सहित देशभर में इन कंपनियों द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला E20 पेट्रोल, एथेनॉल मिश्रित मोटर गैसोलीन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानक IS 17021 के अनुरूप है।
नमूना संग्रह और परीक्षण प्रक्रिया पर सवाल
कंपनियों ने अक्टूबर 2026 में नमूने लेने और उनके परीक्षण के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर चिंता जताई है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन और कदाचार की रोकथाम) आदेश, 2005 तथा विपणन अनुशासन दिशानिर्देश (एमडीजी), 2024 में नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, परीक्षण करने और परिणामों की सूचना देने की प्रक्रिया निर्धारित है।
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाने हैं। इनमें से दो नमूने प्राप्ति की पावती लेकर डीलर को दिए जाते हैं, दो तेल कंपनी या संबंधित विभाग के पास सुरक्षित रखे जाते हैं और दो नियंत्रण आदेश की अनुसूची III में निर्दिष्ट या राजपत्र में अधिसूचित प्रयोगशाला को भेजे जाते हैं। नमूनों के लेबल पर संयुक्त हस्ताक्षर आवश्यक हैं। परीक्षण परिणामों की सूचना निर्धारित समय-सीमा के भीतर डीलर और तेल कंपनी को दी जानी है।
सितंबर 2026 में लिए गए नमूने राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों की नामित प्रयोगशालाओं को भेजे गए थे। वहाँ एमडीजी 2024 के तहत जिन गुणवत्ता मानकों की जाँच का अनुरोध किया गया था, उनके लिए परीक्षण किए गए। इसके बाद अक्टूबर में कथित तौर पर कंपनियों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के बिना नमूने लिए गए। राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से माँगे जाने के बावजूद कंपनियों को सुरक्षित रखे गए संबंधित नमूने, प्रत्येक पेट्रोल पंप का पूरा विवरण या प्रयोगशाला रिपोर्टें प्राप्त नहीं हुई हैं।
प्रकाशित निष्कर्ष एक बाहरी प्रयोगशाला के प्रमाणपत्रों पर आधारित हैं। परीक्षण नियंत्रण आदेश में निर्दिष्ट प्रयोगशाला में नहीं किया गया। प्रमाणपत्रों में एथेनॉल की बताई गई मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आवश्यक पूरा तकनीकी विवरण उपलब्ध नहीं है। सत्यापन के लिए रखे जाने वाले समकक्ष नमूनों और निर्धारित दस्तावेज़ों के अभाव में कंपनियों तथा संबंधित डीलरों को सत्यापन या दोबारा परीक्षण कराने का अवसर भी नहीं मिला है।
परीक्षण पद्धति IS 17021 के अनुरूप होना आवश्यक
कंपनियों के प्रारंभिक तकनीकी आकलन में प्रमाणपत्रों में उल्लिखित एथेनॉल परीक्षण पद्धति पर भी सवाल उठे हैं।
IS 17021:2018 के संशोधन संख्या 3, अगस्त 2025, के अनुसार E20 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित करने के लिए तीन विधियाँ निर्धारित हैं। इनमें ASTM D5845 के तहत फूरियर ट्रांसफॉर्म इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एफटीआईआर), अनुलग्नक C के तहत जल निष्कर्षण और ASTM D4815/D6839 के तहत गैस क्रोमैटोग्राफी शामिल हैं।
ASTM D4815/D6839 के तहत गैस क्रोमैटोग्राफी का उपयोग करने पर नमूने को पहले ऑक्सीजनयुक्त यौगिकों से मुक्त पेट्रोल के साथ 1:1 के अनुपात में मिलाकर पतला करना होता है। इसके बाद E10 की प्रमाणित संदर्भ सामग्री के आधार पर परिणाम का समायोजन किया जाता है।
कर्नाटक सरकार की विज्ञप्ति में उद्धृत प्रमाणपत्रों में केवल “गैस क्रोमैटोग्राफी से एथेनॉल प्रतिशत” का उल्लेख है। इनमें लागू मानक परीक्षण विधि, नमूने को पतला करने की निर्धारित प्रक्रिया या परिणाम के समायोजन में इस्तेमाल की गई संदर्भ सामग्री का विवरण नहीं है। इन जानकारियों के अभाव में 26 से 31 प्रतिशत एथेनॉल के आँकड़ों का IS 17021 में निर्धारित पद्धति के आधार पर स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं है।
प्रमाणपत्रों में दर्ज घनत्व की भी जाँच आवश्यक है। जिन नमूनों में 26 से 31 प्रतिशत एथेनॉल होने का दावा किया गया है, उनका घनत्व 0.742 से 0.749 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर दर्ज है। यह क्यूसीसी-1 और क्यूसीसी-2 सर्वेक्षणों में कंपनियों द्वारा जाँचे गए E20 नमूनों के 0.752 से 0.760 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर के घनत्व से कम है। एथेनॉल का घनत्व पेट्रोल से अधिक होता है, इसलिए मिश्रण में एथेनॉल का अनुपात बढ़ने पर सामान्यतः उसका घनत्व बढ़ने की अपेक्षा होती है। यह अंतर निर्धारित पद्धति से परीक्षण और उपयुक्त संदर्भ नमूनों से सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
कंपनियों और सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी की निगरानी में मानकों के अनुपालन की पुष्टि
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) तेल विपणन कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल मिश्रण और ईंधन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करता है।
तेल विपणन कंपनियों और सीएचटी के गुणवत्ता समन्वय प्रकोष्ठ (क्यूसीसी) की पहल के तहत 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कंपनियों के डिपो और पेट्रोल पंपों से E20 के 893 नमूने लिए गए। इनमें आईओसीएल के 330, बीपीसीएल के 280 और एचपीसीएल के 283 नमूने शामिल थे। रिफाइनरियों और तेल विपणन कंपनियों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं में IS 17021 के अनुलग्नक C के अनुसार इन नमूनों में एथेनॉल की मात्रा जाँची गई। सभी 893 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर पाई गई।
कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों से तीनों कंपनियों के कुल 56 नमूनों की जाँच की गई। सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही और औसत 19.30 प्रतिशत दर्ज किया गया।
इन परिणामों से पुष्टि होती है कि कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल मिश्रण की निगरानी की जाती है और उसका अनुपात निर्धारित सीमा में रखा जाता है। ये परिणाम कर्नाटक सरकार की विज्ञप्ति में बताई गई एथेनॉल की कहीं अधिक मात्रा से मेल नहीं खाते। ऐसे में पारदर्शी और तकनीकी रूप से मान्य परीक्षण आवश्यक है, जिसके परिणामों का सभी संबंधित पक्ष मिलकर सत्यापन कर सकें।
एथेनॉल मिश्रण एक नियंत्रित और स्वचालित प्रक्रिया है
कंपनियों की रिफाइनरियों और डिपो में एथेनॉल मिश्रण के लिए स्थापित और नियंत्रित प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। इन प्रणालियों में स्वचालित अंशांकन और निर्धारित अनुपात में मिश्रण की व्यवस्था है। पूरी प्रक्रिया निर्धारित विनिर्देशों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल के अनुसार संचालित होती है।
कंपनियाँ अपनी आपूर्ति और वितरण शृंखला में स्थापित गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों के माध्यम से यह सुनिश्चित करती हैं कि मिश्रित ईंधन उपभोक्ताओं तक पहुँचने से पहले लागू बीआईएस मानकों के अनुरूप हो।
उपभोक्ताओं पर प्रभाव के दावों का वैज्ञानिक आकलन आवश्यक
माइलेज में कमी से उपभोक्ताओं को सालाना लगभग ₹62,000 करोड़ का नुकसान और वाहनों की मरम्मत पर लगभग ₹39,000 करोड़ का खर्च होने का दावा किया गया है। कुल मिलाकर लगभग ₹1.01 लाख करोड़ के इन दावों की स्थापित तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर समीक्षा आवश्यक है।
30 करोड़ से अधिक दोपहिया और 4 करोड़ से अधिक चारपहिया वाहन तीन साल से अधिक समय से E20 ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। हर दिन 6 करोड़ से अधिक लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर जाते हैं। यदि E20 की गुणवत्ता में व्यापक समस्या होती, तो इतनी बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे वाहनों में बड़े पैमाने पर खराबी सामने आने की अपेक्षा होती। ऐसी व्यापक खराबी की सूचना नहीं मिली है। ईंधन की गुणवत्ता और वाहन प्रदर्शन से जुड़े दावों का आकलन करते समय वास्तविक परिस्थितियों में इतने व्यापक उपयोग को ध्यान में रखना आवश्यक है।
E20 का वाहन प्रदर्शन और माइलेज पर प्रभाव अंतर-मंत्रालयी समिति ने जाँचा है। इस विषय पर हुए अध्ययनों में आईओसीएल, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने भी भाग लिया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से जुड़ी चिंताओं पर अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि E20 के लिए अंशांकित वाहनों के माइलेज में लगभग 1 से 2 प्रतिशत की कमी हो सकती है। कुछ अन्य वाहनों में, उनकी श्रेणी और अंशांकन के आधार पर, यह कमी लगभग 3 से 6 प्रतिशत हो सकती है। यह प्रतिक्रिया पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने 12 अगस्त 2025 को प्रकाशित की थी।
सभी वाहनों के माइलेज में समान रूप से 10 प्रतिशत की कमी मानकर देशभर के उपभोक्ताओं को ₹62,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान वैज्ञानिक रूप से स्थापित आकलन नहीं है। इसी तरह, मरम्मत पर ₹39,000 करोड़ के खर्च के अनुमान की पुष्टि के लिए वाहन प्रदर्शन के वास्तविक आँकड़ों, वाहन में इस्तेमाल सामग्री की ईंधन के साथ अनुकूलता पर हुए अध्ययनों और मरम्मत के दस्तावेज़ी खर्च का पारदर्शी आकलन आवश्यक है।
तकनीकी संस्थाओं और वाहन उद्योग की भागीदारी वाले अध्ययनों में सामग्री की अनुकूलता और वाहन प्रदर्शन से जुड़े पहलुओं की जाँच की जा चुकी है। कार्यक्रम के प्रभाव के किसी भी आकलन में वाहन की श्रेणी, निर्माण विनिर्देश, ईंधन के साथ अनुकूलता और इन तकनीकी अध्ययनों के निष्कर्षों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के आर्थिक, पर्यावरणीय और कृषि संबंधी लाभ
भारत में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत 2001 में एक प्रायोगिक कार्यक्रम से हुई। दो दशकों से अधिक की इस यात्रा में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 और हितधारकों के परामर्श से नीति आयोग द्वारा तैयार भारत में 2025 तक एथेनॉल मिश्रण की कार्ययोजना सहित कई नीतिगत पहलें की गईं।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, घरेलू कृषि मूल्य शृंखलाओं को मजबूत बनाने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के भारत के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 10 जुलाई 2026 को प्रकाशित एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के अनुसार, एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2014–15 से इस कार्यक्रम के तहत निम्नलिखित परिणाम हासिल हुए हैं।
₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत।
लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की आवश्यकता में कमी।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 952 लाख मीट्रिक टन की कमी।
किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान।
कार्यक्रम के समग्र आकलन में कंपनियों के मुनाफे और उपभोक्ताओं पर कथित खर्च के साथ इन आर्थिक, पर्यावरणीय और कृषि संबंधी परिणामों को भी शामिल करना आवश्यक है।
31 अक्टूबर 2026 को समाप्त एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025–26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने 1,089 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदा। 20 प्रतिशत के राष्ट्रीय मिश्रण लक्ष्य की दिशा में इस अवधि में लगभग 5,673 करोड़ लीटर पेट्रोल की बिक्री के सापेक्ष 1,134 करोड़ लीटर एथेनॉल का मिश्रण किया गया। कार्यक्रम एक निर्धारित राष्ट्रीय ढाँचे के तहत संचालित होता है, जिसमें पूरी आपूर्ति शृंखला में मिश्रण के स्तर और गुणवत्ता मानकों की निगरानी की जाती है। अलग-अलग स्थानों पर निर्धारित सीमा से काफी अधिक या कम मिश्रण के अपुष्ट आरोपों के आधार पर पूरे कार्यक्रम के प्रदर्शन का आकलन नहीं किया जा सकता।
कंपनियों के अनुसार, निर्धारित अनुपात से अधिक एथेनॉल मिलाने का कोई व्यावसायिक आधार नहीं है। एथेनॉल की खरीद पर पर्याप्त खर्च होता है और निर्धारित अनुपात से अधिक मिलाया गया हर अतिरिक्त लीटर कंपनियों की खरीद लागत बढ़ाएगा।
कंपनियों ने पारदर्शिता और स्वतंत्र सत्यापन का अनुरोध किया
तीनों कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से नमूना संग्रह के पूरे दस्तावेज़, प्रत्येक पेट्रोल पंप की प्रयोगशाला रिपोर्ट और प्रकाशित निष्कर्षों के लिए अपनाई गई परीक्षण पद्धति का विवरण साझा करने का अनुरोध किया है। कंपनियों ने समकक्ष नमूने उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है, ताकि राज्य सरकार और कंपनियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किसी अधिकृत प्रयोगशाला में विवाद के निपटारे के लिए निर्धारित परीक्षण विधि से स्वतंत्र जाँच की जा सके।
कंपनियाँ नियंत्रण आदेश और एमडीजी 2024 के अनुसार संयुक्त रूप से नमूने लेने और उनका परीक्षण करने में राज्य सरकार तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों के साथ सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं। निर्धारित प्रक्रिया से किसी भी विचलन की पुष्टि होने पर लागू दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
तीनों कंपनियाँ देशव्यापी आपूर्ति और वितरण नेटवर्क में स्थापित गुणवत्ता आश्वासन और निगरानी प्रणालियों के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता, नियामकीय अनुपालन और उपभोक्ता संरक्षण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती हैं।
