भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने वाले जी7 शिखर सम्मेलन के बीच आज दुनिया की निगाहें फ्रांस के एवियन शहर पर टिकी हुई हैं। जी7 सम्मेलन के महत्वपूर्ण चरण में भारत एक साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) के रूप में भाग ले रहा है और इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक पर विशेष ध्यान केंद्रित है।
यह बैठक दोनों नेताओं की फरवरी 2025 में वाशिंगटन डी.सी. में हुई मुलाकात के बाद पहली आमने-सामने की वार्ता होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेता भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा तथा रणनीतिक सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल के वर्षों में भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। दुनिया के कई देश जटिल वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी और बढ़ता कूटनीतिक प्रभाव इस बात का संकेत है कि वैश्विक नीति निर्माण में नई दिल्ली की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
जी7 सम्मेलन के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत बनाने में ‘विश्वास’ की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से परस्पर जुड़ती दुनिया में देशों के बीच भरोसा ही स्थायी सहयोग की नींव है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत हमेशा मानवता-प्रथम दृष्टिकोण का पालन करता आया है और इसकी झलक भारत के नेतृत्व वाली विभिन्न वैश्विक पहलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (इंटरनेशनल सोलर एलायंस), आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई), ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी मानव कल्याण और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की अवधारणा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि पूरा विश्व एक परिवार है।
प्रधानमंत्री मोदी आज जी7 सम्मेलन के दौरान “सभी के लाभ के लिए संतुलित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने” विषय पर आयोजित कार्य सत्र में भी भाग लेंगे। इसके अलावा वे “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित, तीव्र और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने” विषय पर आयोजित कार्यकारी लंच बैठक में भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस चर्चा में एआई तकनीक के अवसरों और उससे जुड़ी चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।
अपने व्यस्त कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री मोदी यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ त्रिपक्षीय बैठक भी करेंगे। इसके अलावा जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता भी निर्धारित है, जिसमें भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के इतर कई महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अलावा उन्होंने केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची तथा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से भी मुलाकात की।
जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी और दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ लगातार हो रही बैठकों को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों से न केवल भारत के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी भारत की भूमिका और अधिक प्रभावशाली बनकर उभरेगी।
