बीजापुर जिले के माओवाद प्रभावित अंदरूनी इलाकों में भी आज लोकतंत्र का महापर्व गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। कभी माओवादियों के कोर एरिया रहे कर्रेगुट्टा हिल्स की करीब पांच हजार फीट ऊंची पहाड़ियों पर स्थापित नए सुरक्षा कैंप में सुरक्षा बलों के जवानों ने ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के साथ मिलकर तिरंगा फहराया।
यह दृश्य ऐतिहासिक रहा, क्योंकि दशकों बाद बीजापुर के उन गांवों में गणतंत्र दिवस मनाया गया, जहां पहले राष्ट्रीय पर्वों पर प्रतिबंध रहता था। हाल ही में स्थापित 31 नए सुरक्षा कैंपों से जुड़े 31 गांवों के ग्रामीण पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए। इन गांवों में बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली, वंदे मातरम् और जय हिंद के नारों से वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।
इसी तरह सुकमा जिले के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में भी गणतंत्र दिवस का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गोगुंदा की पहाड़ियों पर आजादी के बाद पहली बार सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के जवानों ने ध्वजारोहण किया। वहीं, सीआरपीएफ की 150वीं बटालियन ने पालागुड़ा, पूवर्ती और टेकलगुड़ा जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
इसके अलावा गुंडराजगुड़म में भी सीआरपीएफ द्वारा ध्वजारोहण किया गया और स्थानीय ग्रामीणों के साथ समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से विविध सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों ने यह संदेश दिया कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की मजबूत नींव रखी जा रही है।
