वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव देखने को मिला।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 69.86 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,765.92 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 10.60 अंक यानी 0.04 प्रतिशत फिसलकर 23,985.35 अंक पर बंद हुआ।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप-100 इंडेक्स में 0.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 इंडेक्स 0.22 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
आईटी सेक्टर में तेजी, ऊर्जा और एफएमसीजी शेयरों पर दबाव
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी में 2 प्रतिशत और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.08 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी ऑटो 0.69 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.2 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में 1.7 प्रतिशत की गिरावट रही और यह सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी एफएमसीजी में 1.4 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.9 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.6 प्रतिशत और निफ्टी बैंक में 0.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी इंफ्रा, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मीडिया भी नुकसान में रहे।
टीसीएस और टेक शेयरों में बढ़त
निफ्टी-50 में टीसीएस का शेयर 4.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा लाभ में रहा। इसके बाद इटरनल में 3.94 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 3.49 प्रतिशत, नेस्ले इंडिया में 3.19 प्रतिशत, सिप्ला में 2.67 प्रतिशत, टाइटन में 2.49 प्रतिशत और इंफोसिस में 2.39 प्रतिशत की तेजी रही।
वहीं, हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में सबसे ज्यादा 7.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में 4.46 प्रतिशत, कोल इंडिया में 3.98 प्रतिशत, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में 2.19 प्रतिशत और एनटीपीसी में 2.19 प्रतिशत की गिरावट आई।
मध्य पूर्व तनाव से बाजार की धारणा प्रभावित
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सत्र की तेज बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इसके अलावा मध्य पूर्व में जारी तनाव को लेकर बनी अनिश्चितताओं ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
अमेरिका और ईरान के बीच हमले रोकने की खबरों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रहने की उम्मीद है। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही और यह घटकर करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
