प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीडन के गोथेनबर्ग में चुनिंदा स्वीडिश कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है। इस विशेष बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वीडिश कंपनियों को मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन जैसी भारत की महत्वाकांक्षी पहलों के तहत देश में अपनी उपस्थिति और निवेश बढ़ाने के लिए पुरजोर वकालत की। उन्होंने विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि भारत और स्वीडन लोकतंत्र, पारदर्शिता, नवाचार तथा सतत विकास के साझा मूल्यों से आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि स्वीडन की नवाचार और संधारणीयता (सस्टेनेबिलिटी) की ताकतों को भारत के बड़े पैमाने, असीम टैलेंट और तेज विकास की गति के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि दोनों देश मिलकर वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकें।
भारत के तीव्र आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने देश में मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI), विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार और अगली पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का विशेष रूप से उल्लेख किया। इस गोलमेज बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच लचीली आपूर्ति श्रृंखला (रेजिलिएंट सप्लाई चेन), हरित संक्रमण (ग्रीन ट्रांजिशन), टिकाऊ गतिशीलता (सस्टेनेबल मोबिलिटी), लाइफ साइंसेज और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान सह-निर्मित करने के लिए दोनों देशों की विशिष्ट क्षमताओं का एक साथ आना बेहद जरूरी है।
भारत-स्वीडन संबंधों के भविष्य की दिशा तय करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश अब केवल खरीदार और विक्रेता के पारंपरिक रिश्ते से ऊपर उठकर एक दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस साल जनवरी में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच संपन्न हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता उद्योगों, निवेशकों और नए नवोन्मेषकों (इनोवेटर्स) के लिए असीम अवसरों के द्वार खोलेगा। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की पिछली टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण समझौते को ‘सभी सौदों की जननी’ (मदर ऑफ ऑल डील्स) के रूप में वर्णित किया था।
