भारत में आमतौर पर पनीर को ही सबसे लोकप्रिय चीज़ माना जाता है, लेकिन अब भारतीय चीज़ों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली है। ब्राजील में आयोजित प्रतिष्ठित विश्व चीज़ चैंपियनशिप “मुंडियल डो क्वेजो” (Mundial do Queijo) में भारतीय चीज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए हैं।
इस प्रतियोगिता में दुनिया के 30 से अधिक देशों ने लगभग 2,700 प्रकार के चीज़ नमूने प्रस्तुत किए थे। पहली बार इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले भारतीय उत्पादकों ने अपनी गुणवत्ता और नवाचार के दम पर निर्णायकों को प्रभावित किया। मुंबई की एलेफ्टिया चीज़ कंपनी ने अपनी तीन किस्मों को प्रतियोगिता में उतारा, जबकि लद्दाख की नॉर्डिक फार्म ने एक विशेष चीज़ प्रस्तुत किया।
चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ चीज़ को “सुपर गोल्ड” सम्मान दिया जाता है, इसके बाद गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज श्रेणियां होती हैं। इस वर्ष भारतीय चीज़ “एलेफ्टिया गुलमर्ग” ने सुपर गोल्ड पुरस्कार जीतकर देश का नाम रोशन किया। यह एक मुलायम और क्रीमी चीज़ है, जिसे फ्रांसीसी ब्री (Brie) शैली में तैयार किया जाता है। इसे गाय के दूध से बनाया जाता है और विशेष तापमान नियंत्रित कक्ष में दो से तीन सप्ताह तक परिपक्व किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बनावट बेहतर हो जाती है।
गोल्ड मेडल जीतने वाले उत्पादों में एलेफ्टिया ब्रुनोस्ट भी शामिल है। यह चीज़ उस व्हे (Whey) से बनाया जाता है जो सामान्यतः चीज़ निर्माण के बाद बच जाता है और अक्सर बेकार समझा जाता है। इस अवशेष को उपयोग में लाकर तैयार किया गया ब्रुनोस्ट स्वाद और नवाचार दोनों के लिए सराहा गया।
दूसरा गोल्ड मेडल लद्दाख के पारंपरिक “याक चुरपी” को मिला। यह चीज़ याक के दूध से बनाया जाता है और मूल रूप से काफी कठोर तथा चबाने योग्य होता है। हालांकि नॉर्डिक फार्म ने इसे एक नरम और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल रूप में विकसित किया, जिससे यह व्यापक उपभोक्ता वर्ग के लिए आकर्षक बन गया।
सिल्वर मेडल एलेफ्टिया काली मिर्च चीज़ को मिला। यह एक छोटा चीज़ बॉल है, जिसकी बाहरी सतह पर काली मिर्च की परत चढ़ाई जाती है। इसका अनूठा स्वाद और प्रस्तुति इसे अन्य चीज़ों से अलग बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भारतीय डेयरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत में पनीर के अलावा भी कई पारंपरिक चीज़ मौजूद हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर का कलाड़ी चीज़ और गुजरात तथा मुंबई क्षेत्र का टोपली नो पनीर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
विश्व स्तर पर मिली इस पहचान से यह साबित होता है कि भारतीय डेयरी उत्पाद केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर भी खरे उतर सकते हैं। भारतीय चीज़ निर्माताओं की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
