केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई लगातार बढ़ रही है और इस महीने की 15 तारीख तक कुल बोया गया क्षेत्र 83 लाख हेक्टेयर से अधिक दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार ग्रीष्मकालीन फसलों के क्षेत्रफल में तीन लाख हेक्टेयर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसे कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में खाद्यान्न उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार धान की बुवाई सबसे बड़े हिस्से में की गई है। देशभर में 31 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सिंचाई सुविधाओं, मौसम की अनुकूल परिस्थितियों और किसानों को मिल रही सरकारी सहायता के कारण धान की खेती में लगातार विस्तार हो रहा है। धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में शामिल है और इसकी बढ़ती बुवाई को खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दलहन फसलों की खेती में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। मंत्रालय ने बताया कि 24 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में दलहन की बुवाई की गई है। सरकार लगातार दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है ताकि देश में आयात पर निर्भरता कम हो सके और किसानों की आय में वृद्धि हो। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दलहन फसलें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करती हैं और टिकाऊ कृषि प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
इस बार श्री अन्न और मोटे अनाजों की खेती में भी वृद्धि दर्ज की गई है। मंत्रालय के अनुसार 16 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में श्री अन्न और मोटे अनाजों की बुवाई की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग एक लाख हेक्टेयर अधिक है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चला रही है। श्री अन्न को पोषण से भरपूर और जलवायु के अनुकूल फसल माना जाता है। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली इन फसलों को किसानों के लिए लाभकारी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और जल संकट के बीच मोटे अनाजों की खेती भविष्य में और महत्वपूर्ण हो सकती है। यही कारण है कि सरकार किसानों को इन फसलों की ओर आकर्षित करने के लिए जागरूकता अभियान और विभिन्न योजनाएं चला रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मोटे अनाजों की मांग बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना बढ़ी है।
तिलहन फसलों की खेती में भी अच्छी प्रगति देखने को मिली है। मंत्रालय ने बताया कि देशभर में 11 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तिलहन की बुवाई की गई है। खाद्य तेलों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तिलहन उत्पादन में लगातार वृद्धि होती है तो खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
कृषि मंत्रालय का कहना है कि बेहतर बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, मौसम आधारित सलाह और सरकारी योजनाओं के कारण किसानों का रुझान खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा कई राज्यों में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि यंत्रीकरण ने भी बुवाई क्षेत्र बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल बना रहता है और किसानों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते हैं तो इस वर्ष ग्रीष्मकालीन फसलों का उत्पादन बेहतर रह सकता है। इससे खाद्यान्न उपलब्धता मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र की वृद्धि को भी गति मिल सकती है। लगातार बढ़ती बुवाई यह संकेत देती है कि देश का कृषि क्षेत्र नई तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसका लाभ किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को मिल सकता है।
