उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए भुगतान और पर्ची व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो चुकी है। योगी सरकार द्वारा लागू की गई ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के जरिए गन्ना सर्वे, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल फोन पर प्राप्त हो रही है, जबकि भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजा जा रहा है। इससे किसानों को समय पर भुगतान मिलने लगा है और पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी बन गई है।
राज्य सरकार के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 में उत्तर प्रदेश की 121 चीनी मिलों ने 877.96 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इनमें यूपी राज्य चीनी निगम की 3 मिलें, यूपी सहकारी चीनी मिल संघ की 23 मिलें और निजी क्षेत्र की 95 चीनी मिलें शामिल हैं। खास बात यह है कि महाराष्ट्र में 210 चीनी मिलें संचालित होने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने औसत चीनी परता यानी एवरेज शुगर रिकवरी के मामले में बढ़त हासिल की है। उत्तर प्रदेश का औसत चीनी परता 10.21 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि महाराष्ट्र का 9.49 प्रतिशत और कर्नाटक का 8.19 प्रतिशत रहा।
सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग की वजह से किसानों को पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं और उत्पादन क्षमता में भी सुधार हुआ है। वहीं गन्ना मूल्य में वृद्धि से किसानों की आय में भी बड़ा इजाफा हुआ है। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की है। अगेती प्रजातियों के लिए 400 रुपये प्रति कुंतल और सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति कुंतल का मूल्य तय किया गया है। इस बढ़ोतरी से किसानों को करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराया जा रहा है। सरकार का दावा है कि समय पर भुगतान और बेहतर मूल्य से प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में गन्ना विकास विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
