दुनिया भर में लकवे और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का इलाज चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है। ऐसे में ब्राजील की वैज्ञानिक टाटियाना कोएल्हो डी सम्पायो का शोध नई उम्मीद लेकर आया है। करीब 30 वर्षों तक लगातार किए गए उनके शोध ने वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
टाटियाना ने मानव प्लेसेंटा में पाए जाने वाले लैमिनिन नामक प्रोटीन का अध्ययन करते हुए एक विशेष संरचना विकसित की, जिसे पॉलीलैमिनिन नाम दिया गया। लैमिनिन शरीर में कोशिकाओं और ऊतकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पॉलीलैमिनिन क्षतिग्रस्त तंत्रिका तंतुओं के बीच एक जैविक पुल का काम कर सकता है और न्यूरॉन्स के पुनर्जनन में सहायता कर सकता है।
शोध के दौरान इस पदार्थ का परीक्षण पहले पशुओं पर किया गया। परिणामों में यह देखा गया कि पॉलीलैमिनिन ने क्षतिग्रस्त तंत्रिका तंतुओं की मरम्मत और नए संपर्क बनाने में मदद की। इसके बाद सीमित मानव परीक्षणों में भी कुछ सकारात्मक संकेत मिले।
प्रारंभिक अध्ययन में गंभीर स्पाइनल कॉर्ड इंजरी वाले आठ मरीजों को उपचार दिया गया। इनमें से कई मरीजों में शरीर के प्रभावित हिस्सों में संवेदना और मांसपेशियों की गतिविधि से जुड़े सुधार दर्ज किए गए। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि ये शुरुआती परिणाम हैं और अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह उपचार पूरी तरह सफल या सभी मरीजों के लिए प्रभावी है।
2026 में ब्राजील की स्वास्थ्य नियामक संस्था ने पॉलीलैमिनिन के औपचारिक मानव परीक्षणों को मंजूरी दी है। अब बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल के माध्यम से इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो यह खोज स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और लकवे के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। हालांकि फिलहाल इसे एक संभावनाशील प्रयोगात्मक तकनीक के रूप में ही देखा जा रहा है और अंतिम निष्कर्ष आने में अभी समय लगेगा।
यह शोध एक बार फिर दिखाता है कि लंबे समय तक समर्पण और वैज्ञानिक जिज्ञासा के साथ किया गया कार्य चिकित्सा विज्ञान में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।
