भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की घोषणा करेगा। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा मुंबई में सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे। छह सदस्यीय एमपीसी ने बुधवार से शुरू हुई अपनी तीन दिवसीय बैठक में अर्थव्यवस्था, महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई इस बार प्रमुख नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाना चाहता है। क्षेत्रीय संघर्षों के कारण ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे महंगाई और आर्थिक विकास दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हाल ही में सी. एस. सेट्टी ने भी कहा था कि मौजूदा महंगाई संबंधी चुनौतियों के बीच यदि आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है तो आर्थिक विकास की प्रक्रिया अधिक स्थिर बनी रह सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक अपनी महंगाई दर के अनुमान को बढ़ा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर के अनुमान में मामूली कटौती कर सकता है।
सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई के लिए 4 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आरबीआई को 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के दायरे में महंगाई बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है। अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई थी। इसकी प्रमुख वजह सोने-चांदी के आभूषणों और कुछ रसोई से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि रही।
आज की मौद्रिक नीति घोषणा पर निवेशकों, उद्योग जगत, बैंकिंग क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं। ब्याज दरों को लेकर आरबीआई का फैसला आने वाले महीनों में ऋण, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
