भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों की कड़े शब्दों में निंदा की है। दोनों नेताओं ने विशेष रूप से पाकिस्तान से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद पर चिंता व्यक्त की।
भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने 29 जुलाई 2025 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।
दोनों देशों ने पिछले वर्ष 10 नवंबर को दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की। भारत और जापान ने इस जघन्य घटना के दोषियों, साजिशकर्ताओं और वित्तीय सहायता देने वालों को बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाने की मांग की।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने अल-कायदा, आईएसआईएस/दाएश, लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और उनके सहयोगी संगठनों सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने, आतंक वित्तपोषण के नेटवर्क को तोड़ने और आतंकियों की सीमा पार आवाजाही रोकने पर जोर दिया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक मजबूत और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा लक्ष्य को लेकर समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने क्वाड ढांचे के तहत हो रही प्रगति का स्वागत किया और व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
उन्होंने क्वाड के चार प्रमुख स्तंभों—समुद्री एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा (जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स शामिल हैं), उभरती प्रौद्योगिकियां और मानवीय सहायता एवं आपदा प्रतिक्रिया—में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
भारत और जापान ने अगले क्वाड लीडर्स समिट के जल्द आयोजन के लिए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। साथ ही, आसियान सदस्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और समृद्धि को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
