“अरे, बंद करो वो टीवी, दिमाग खराब हो जाएगा!” यह बात हमारे घरों में पीढ़ियों से सुनी जाती रही है। भले ही “दिमाग खराब होना” एक बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात लगे, लेकिन एक नए अध्ययन से पता चलता है कि बहुत ज्यादा टीवी देखने से मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर गंभीर और नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अल्जाइमर एंड डिमेंशिया: जर्नल ऑफ द अल्जाइमर एसोसिएशन में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, जिन वयस्कों ने मध्यआयु (Midlife) के दौरान “बहुत अक्सर” टीवी देखने की बात स्वीकार की, उनके दिमाग के याददाश्त वाले हिस्सों का आकार बाद में छोटा पाया गया। इसके अलावा, उनके फ्रंटल और ऑक्सिपिटल लोब (Frontal and Occipital Lobes) का वॉल्यूम भी कम था और दिमाग के ‘व्हाइट मैटर’ (White Matter) को ज्यादा नुकसान पहुंचा था। इस तरह के बदलावों का सीधा संबंध बुढ़ापे, स्ट्रोक के जोखिम, मानसिक क्षमताओं में कमी और डिमेंशिया से होता है।
दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (USC) के प्रोफेसर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डेविड रायचलेन कहते हैं:
“बरसों से हमारा ध्यान इस बात पर रहा है कि लोग कितनी देर बैठते हैं। लेकिन हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि लोग बैठकर कर क्या रहे हैं।”
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नुकसान सिर्फ शारीरिक निष्क्रियता (Inactivity) के कारण नहीं था। बैठकर की जाने वाली अन्य गतिविधियों में दिमाग पर ऐसा असर नहीं देखा गया। इससे पता चलता है कि बैठकर की जाने वाली गतिविधि का प्रकार शारीरिक निष्क्रियता से ज्यादा मायने रखता है।
मध्यआयु में टीवी देखने की आदतों पर शोध
अनुसंधान टीम ने लगभग 1,700 वयस्कों (औसत आयु 53 वर्ष) के डेटा का विश्लेषण किया। ये प्रतिभागी 1987 से 1989 के बीच ‘अथेरोस्क्लेरोसिस रिस्क इन कम्युनिटीज’ (ARIC) अध्ययन में शामिल हुए थे, जो हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर केंद्रित एक दीर्घकालिक शोध है।
प्रतिभागियों ने बताया कि वे अपने खाली समय में कितनी बार टीवी देखते हैं और अपने कामकाजी समय का कितना हिस्सा बैठकर बिताते हैं। लगभग 20 साल से भी अधिक समय बाद, इन सभी प्रतिभागियों का ‘ब्रेन एमआरआई’ (Brain MRI) स्कैन किया गया।
मस्तिष्क के हिस्सों का सिकुड़ना और व्हाइट मैटर को नुकसान
जिन लोगों ने “बहुत अक्सर” टीवी देखने की रिपोर्ट दी थी, उनके दिमाग के उन हिस्सों का आकार छोटा पाया गया जो अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती लक्षणों से जुड़े होते हैं।
इसके मुख्य निष्कर्ष:
- स्मृति क्षेत्र (Memory Regions): याददाश्त से जुड़े हिस्सों का वॉल्यूम कम पाया गया।
- फ्रंटल और ऑक्सिपिटल लोब: निर्णय लेने, प्लानिंग करने और दृश्य प्रसंस्करण (Visual Processing) से जुड़े लोब्स का आकार छोटा था।
- व्हाइट मैटर हाइपरइंटेंसिटी (WMH): मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं के नुकसान से जुड़े लक्षण अधिक पाए गए।
यह अंतर तब भी बना रहा जब शोधकर्ताओं ने शारीरिक गतिविधि, मधुमेह (Diabetes), बीएमआई (BMI), धूम्रपान और शराब के सेवन जैसे कारकों को पूरी तरह से ध्यान में रखा।
क्या बैठकर काम करना भी नुकसानदायक है?
इस अध्ययन का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह था कि केवल बैठना दिमाग के लिए बुरा नहीं पाया गया।
जो लोग अपने काम के दौरान लंबे समय तक बैठकर काम करते थे, उनके मस्तिष्क का फ्रंटल और ऑक्सिपिटल लोब बड़ा था और व्हाइट मैटर को नुकसान भी कम था। वैज्ञानिकों का मानना है कि नौकरी या काम के दौरान दिमाग सक्रिय रहता है—लोग समस्याओं को सुलझाते हैं और ध्यान केंद्रित करते हैं। यानी दिमागी रूप से सक्रिय रहकर बैठना (Mentally Active Sitting), टीवी देखने जैसी निष्क्रिय गतिविधि (Passive Viewing) से काफी अलग है।
पुरुषों पर अधिक प्रभाव
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि टीवी देखने और बैठकर काम करने से जुड़े मस्तिष्क के ये बदलाव महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक स्पष्ट थे। इसका मतलब है कि पुरुषों का मस्तिष्क इन आदतों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है, हालांकि इस पर और शोध की आवश्यकता है।
सलाह
यूएससी डोर्नसिफ के शोधकर्ता नातन फेटर का कहना है कि भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी सलाहों में बदलाव की जरूरत है। अब डॉक्टरों को सिर्फ यह कहने के बजाय कि “कम बैठें”, मरीजों को यह भी सलाह देनी चाहिए कि वे बैठकर टीवी देखने के बजाय दिमागी रूप से सक्रिय करने वाले काम (जैसे पढ़ना, पहेलियां सुलझाना या शतरंज खेलना) चुनें।
अध्ययन स्रोत: यह लेख अल्जाइमर एंड डिमेंशिया: जर्नल ऑफ द अल्जाइमर एसोसिएशन में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया (USC) के अध्ययन पर आधारित है।
