केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ की अपनी पहचान से आगे बढ़ते हुए अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के दम पर ‘विश्व की प्रयोगशाला’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह बात अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएमए) में आयोजित आईआईएमए हेल्थकेयर समिट 2026 के तीसरे संस्करण में कही।
‘स्वास्थ्य सेवा में एआई को बढ़ावा देना’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में अनुप्रिया पटेल ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग ने 200 से अधिक देशों को टीकों और जरूरी चिकित्सा उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की, जबकि देश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत 220 करोड़ से अधिक खुराक दी गईं।
स्वास्थ्य सेवा में एआई की बड़ी संभावनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) दवा खोज की प्रक्रिया को तेज करने, व्यक्तिगत उपचार विकसित करने और बेहतर स्वास्थ्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा एआई के माध्यम से नैदानिक निर्णय, रोग निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा में एआई का इस्तेमाल सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित तरीके से होना चाहिए। मरीजों की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है और एआई को चिकित्सकों के नैदानिक निर्णय का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक बनाया जाना चाहिए।
पायलट परियोजनाओं से बड़े स्तर पर क्रियान्वयन की जरूरत
अनुप्रिया पटेल ने सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य संस्थाओं, स्टार्टअप और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को पायलट परियोजनाओं से आगे ले जाकर बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवा में एआई के लिए उत्कृष्टता केंद्र एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में स्थापित किए गए हैं।
फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की 5,000 करोड़ रुपये की फार्मा-मेडटेक सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार प्रोत्साहन (PRIP) योजना का उद्देश्य अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना है।
उन्होंने केंद्रीय बजट में घोषित 10,000 करोड़ रुपये के बायोफार्मा शक्ति मिशन का भी उल्लेख किया। इस मिशन का उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में क्षमता बढ़ाना, कुशल मानव संसाधन तैयार करना तथा नियामक और क्लिनिकल ट्रायल क्षमताओं को मजबूत करना है।
दवा खोज में एआई से घटेगा समय
औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि बड़ी फार्मा कंपनियां उत्पादन, मानव संसाधन, विपणन, वितरण और इन्वेंट्री प्रबंधन में एआई का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। वहीं, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में कई स्टार्टअप दवा खोज के लिए एआई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एआई संभावित दवा उम्मीदवारों की पहचान और चयन को तेज कर सकता है, जिससे नई दवाओं की खोज में लगने वाला समय कम किया जा सकता है। उन्होंने पूंजी, सॉफ्टवेयर लाइसेंस, कंप्यूटिंग क्षमता और विशेषज्ञ प्रतिभा जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मिल रहा विस्तार
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित करने और एआई के जिम्मेदार एवं साक्ष्य-आधारित उपयोग को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत खुले और अंतरसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को विकसित किया जा रहा है। इसके तहत 96 करोड़ से अधिक आभा आईडी और 1,000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से जुड़े हैं।
उन्होंने तपेदिक और मधुमेह रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान में एआई के उपयोग तथा ई-संजीवनी के जरिए एआई आधारित नैदानिक निर्णय सहायता की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार ई-संजीवनी से 20 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं।
इंडिया फार्मा आर्काइव्स का अनावरण
समिट के दौरान इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) और आईआईएम अहमदाबाद आर्काइव्स के सहयोग से शुरू की गई डिजिटल पहल ‘इंडिया फार्मा आर्काइव्स’ का भी अनावरण किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग के विकास और इतिहास को दस्तावेजीकृत एवं संरक्षित करना है।
इस डिजिटल संग्रह में मौखिक इतिहास, ऐतिहासिक दस्तावेज, तस्वीरें और दुर्लभ मीडिया सामग्री शामिल की गई है। कार्यक्रम में भारत में कोविड-19 वैक्सीन के विकास और देश की वैज्ञानिक एवं फार्मास्युटिकल प्रतिक्रिया पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
आईआईएमए हेल्थकेयर समिट 2026 में नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने स्वास्थ्य सेवा में एआई के भविष्य पर चर्चा की। सम्मेलन का उद्देश्य भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन और 2047 तक स्वस्थ एवं विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग को आगे बढ़ाना रहा।
