केंद्र सरकार देश में सोलर पैनल की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी देने की योजना तैयार कर रही है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने शुक्रवार को बताया कि पॉलीसिलिकॉन सोलर पैनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण घटक है और सरकार इस क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नई पहल पर काम कर रही है।
नई दिल्ली में आयोजित एक समिट के दौरान मीडिया से बातचीत में सारंगी ने कहा कि सरकार ने पॉलीसिलिकॉन के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की थी, लेकिन इसके तहत देश में अपेक्षित स्तर की उत्पादन क्षमता विकसित नहीं हो सकी। इसी को देखते हुए अब पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी देने के विकल्प पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजना अभी तैयार होने की प्रक्रिया में है, इसलिए इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी फिलहाल साझा नहीं की जा सकती।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए मैनेजमेंट प्लान जरूरी
सारंगी ने फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा करने से पहले एक व्यापक मैनेजमेंट प्लान तैयार करना जरूरी होगा। इसमें जल क्षेत्र की स्थिति, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय मछुआरों की आजीविका से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने हाल ही में रांची के गेटलसुद बांध में 100 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस परियोजना के तहत क्षेत्र पर निर्भर मछुआरों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए व्यापक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है।
मछुआरों की आय बढ़ाने पर जोर
सारंगी के अनुसार, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में केज फिशरीज यानी पिंजरे में मछली पालन को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है, जिससे प्रभावित मछुआरों के लिए आय के बेहतर अवसर पैदा हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत सौर ऊर्जा की क्षमता को और मजबूत करने के लिए बैटरी स्टोरेज में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इससे सौर ऊर्जा के बेहतर भंडारण और जरूरत के समय उसके उपयोग में मदद मिलेगी।
