विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को स्थित क्रेमलिन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा व्यापार, ऊर्जा, अर्थव्यवस्था समेत विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। बैठक में भारतीय राजदूत विनय कुमार और संयुक्त सचिव (ईआरएस) मयंक सिंह भी मौजूद रहे।
मुलाकात के दौरान डॉ. जयशंकर ने भारत और रूस के बीच लगातार मजबूत हो रही साझेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राष्ट्रपति पुतिन को शुभकामनाएं दीं और उनका व्यक्तिगत संदेश भी सौंपा। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच अंतर-सरकारी आयोग की बैठक भी उसी दिन हुई, जिसके परिणाम सकारात्मक रहे।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर जोर

जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु सहयोग सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने तथा द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना है। इसके लिए बाजार पहुंच में सुधार, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करना, भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना और दोनों देशों के कारोबारों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
एससीओ और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी जिक्र
विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन में बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात को लेकर उत्सुक हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी रूस के राष्ट्रपति को भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वागत करने की उम्मीद रखते हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों नेता अपनी सुविधा के अनुसार वार्षिक शिखर बैठक भी करेंगे। जयशंकर के मुताबिक, ये घटनाक्रम भारत-रूस के बीच व्यापक और लगातार मजबूत होते सहयोग को दर्शाते हैं।
पुतिन ने भारत को उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की
बैठक के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को उर्वरक की आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र को समर्थन देने के लिए कदम उठा रहा है।
पुतिन ने इस वर्ष भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारत-रूस संबंधों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जयशंकर की रूस यात्रा दोनों देशों के बीच दशकों से स्थापित मजबूत संबंधों के स्तर को दर्शाती है।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देश लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, जो द्विपक्षीय साझेदारी के व्यापक और लगातार विस्तार को दर्शाता है।
अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में भी शामिल हुए जयशंकर
इससे पहले डॉ. जयशंकर ने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस साझेदारी ने लगातार अपनी मजबूती और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता साबित की है। उन्होंने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार गहरा हुआ है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच आपसी हितों और विश्वास पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करना जरूरी है।
डॉ. जयशंकर सोमवार से रूस के दो दिवसीय दौरे पर हैं। यात्रा के दौरान वह अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
