नेपाल में कल आए एक भीषण फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में लगभग 160 लोगों की जान जा चुकी है और 750 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। तिब्बत से शुरू हुई इस बाढ़ ने मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, कई मुख्य पुल बहा दिए और लगभग एक दर्जन जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को सूचित किया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इसके ठीक तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर फटने (जीएलओएफ) से यह बाढ़ आई। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित ल्हेंदे नदी में भूस्खलन और जलस्तर बढ़ने के कारण रसुवा जिले के तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए यह बाढ़ त्रिशूली नदी में दाखिल हुई। इसके बाद यह पानी काठमांडू से लगभग 200 किलोमीटर के दायरे में फैले नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे जिलों में फैल गया।
राहत-बचाव कार्य और जान-माल का नुकसान
- मौतों और लापता का आंकड़ा: नेपाल पुलिस के अनुसार 157 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सरकार ने लगभग 500 लोगों के लापता होने की बात कही है। चीन की ओर भी 3 लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की खबर है।
- लापता सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक: लापता लोगों में अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड सहित दो दर्जन से अधिक देशों के नागरिक शामिल हैं। साथ ही 44 नेपाली सेना के जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं।
- अवसंरचना को नुकसान: बाढ़ के कारण 354 मेगावाट क्षमता की 8 चालू जलविद्युत परियोजनाएं और 5 निर्माणाधीन परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके अलावा 19 मोटर योग्य पुल बह गए हैं।
- बचाव अभियान: प्रभावित क्षेत्रों से लगभग 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से 30 का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को व्यापक बचाव कार्य में लगाया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय सहायता और हेल्पलाइन नंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है और भारत ने राहत सामग्री की पहली किश्त भी भेज दी है। दूसरी ओर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी लापता लोगों की तलाश के लिए पीपल सशस्त्र पुलिस बल के 145 जवानों को सीमावर्ती इलाकों में तैनात किया है।
भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं: +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास का हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 (व्हाट्सएप पर भी उपलब्ध) है। लापता भारतीयों में से कम से कम 50 कैलाश मानसरोवर यात्रा के श्रद्धालु थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है।
