भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ‘लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल’ (LR-AShM) की मारक क्षमता को 1,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 3,500 किलोमीटर तक करने पर तेजी से काम चल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसके लिए अगले 2 से 3 वर्षों में अतिरिक्त परीक्षण किए जाएंगे। सफल परीक्षणों के बाद 2028-29 तक इस मिसाइल को उत्पादन चरण में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
हार्डवेयर नहीं, सॉफ्टवेयर और ट्रैजेक्टरी में बदलाव
रेंज बढ़ाने के लिए DRDO किसी बड़े हार्डवेयर बदलाव के बजाय सॉफ्टवेयर अपग्रेड और नई फ्लाईट ट्रैजेक्टरी का सहारा ले रहा है। LR-AShM में इस्तेमाल होने वाले दो-चरणीय (two-stage) सॉलिड रॉकेट बूस्टर K-4 बैलिस्टिक मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित हैं। क्योंकि K-4 की रेंज पहले से ही लगभग 3,500 किमी है, इसलिए मौजूदा डिजाइन की क्षमताओं का उपयोग करके सॉफ्टवेयर-आधारित सुधारों से LR-AShM की रेंज बढ़ाई जा रही है।
रफ्तार और चकमा देने की अद्भुत क्षमता
LR-AShM एक बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक मिसाइल है। लॉन्च के बाद इसका सॉलिड-फ्यूल बूस्टर मिसाइल को बेहद तेज गति देता है, जिसके बाद ग्लाइड व्हीकल वायुमंडल में तैरते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
- मैक 10 की रफ्तार: इस मिसाइल की अधिकतम गति लगभग 12,348 किमी/घंटा (मैक 10) और औसत गति 6,174 किमी/घंटा (मैक 5) तक पहुंच सकती है।
- दिशा बदलने में माहिर: यह उड़ान के दौरान अपनी ऊंचाई और दिशा बदल सकती है। इस वजह से दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसकी सटीक स्थिति का अनुमान लगाना और इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।
- चलते जहाजों पर सटीक निशाना: इसमें लगा स्वदेशी टर्मिनल गाइडेंस सेंसर अंतिम चरण में भी दुश्मन के गतिशील युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर्स की लोकेशन को ट्रैक करके सही निशाना लगाता है।
हिंद महासागर में ‘मैरीटाइम डिनायल’ क्षमता होगी मजबूत
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों को देखते हुए 3,500 किमी की रेंज भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- मैरीटाइम डिनायल (Maritime Denial): इसका मतलब है कि दुश्मन की नौसेना को समुद्र में निर्बाध रूप से काम करने से रोकना।
- रणनीतिक बढ़त: ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों के साथ मिलकर LR-AShM भारत को विभिन्न दूरी और गति वाली मारक क्षमता प्रदान करेगी।
थल सेना और वायु सेना के लिए भी प्रस्ताव
DRDO ने LR-AShM को भारतीय थल सेना और वायु सेना के लिए भी प्रस्तावित किया है। भविष्य में इसके ग्राउंड-अटैक संस्करण विकसित किए जा सकते हैं, जिससे तीनों सेनाएं जमीन पर मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर लंबी दूरी से हमला करने में सक्षम हो सकेंगी।
वर्ष 2023, 2024 और मई 2026 में हुए परीक्षणों के दौरान इस मिसाइल ने 1,500 किलोमीटर की दूरी पर समुद्री लक्ष्य पर सटीक निशाना साधकर अपनी मारक क्षमता साबित की थी। अब 3,500 किमी की बढ़ी हुई रेंज के साथ यह मिसाइल भारत की समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने जा रही है।
