“अमीन से आसान तक: शब्दों की चमक” अंतरंग में गूंजा
“सिनेमा का सार तर्क नहीं, जादू है” — विनय सपूर और राधिका राव
यूपीएससी पर्वत चढ़ना और सिविल सर्विसेज जीवन
“ओरछा कलम” का भव्य विमोचन
“अस्वस्थ व्यक्ति को बच्चा पैदा करने का अधिकार नहीं” — डॉ. शिव कुमार सरिन
भोपाल: भारत भवन के सांस्कृतिक परिसर में आयोजित भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल के आठवें संस्करण का रविवार को समापन स्मृतियों, विचारों और रचनात्मक ऊर्जा के गूंजते स्वरों के साथ हुआ। यह तीन दिवसीय “ज्ञान कुंभ” शब्दों, संवेदनशीलता और विमर्श को एक मंच पर बुनकर राजधानी भोपाल को बौद्धिक उत्सव का साक्षी बना गया। साहित्य, कला, संस्कृति, समाज और समकालीन चिंतन पर 60 से अधिक सत्रों में भारत और विदेश के 100 से ज़्यादा विचारक, लेखक, कलाकार व बुद्धिजीवियों ने अपने दृष्टिकोण और अनुभव साझा किए। प्रत्येक दिन नए विचारों, प्रश्नों और संवादों से भरा रहा, जहाँ किताबों की पंक्तियाँ जीवन से संवाद करती प्रतीत हुईं और चिंतन समाज के वर्तमान व भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालता रहा। अंतिम दिन भी इतिहास, लोकतंत्र, संस्कृति, संवैधानिक मूल्य, कला और मानवीय चिंताओं पर गहन चर्चाओं के साथ बौद्धिक उत्सव की जीवंतता जारी रही।
समापन संध्या साहित्यिक चर्चा से आगे बढ़कर आध्यात्मिक व सांस्कृतिक अनुभव बनी। आचार्य शंकराचार्य के जीवन, दर्शन व बौद्धिक यात्रा पर केंद्रित “दास्तान शंकर स्तोत्र” प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गई। शब्द, संगीत व अभिव्यक्ति के माध्यम से शंकराचार्य के विचार जीवंत हो उठे और फेस्टिवल का समापन अविस्मरणीय सांस्कृतिक क्षण बना। फेस्टिवल निदेशक डॉ. राघव चंद्रा व अभिलाष खंडेकर भी उपस्थित रहे। समापन संबोधन में डॉ. चंद्रा ने अगले वर्ष फेस्टिवल के लौटने का वादा किया।
इधर अंतरंग सभागार में काव्य व साहित्य मनाने वाला भावुक सत्र “अमीन से आसान तक: शब्दों की चमक” आयोजित हुआ। मंजू मेहता के संचालन में प्रमुख वक्ता प्रसिद्ध कवि अलोक श्रीवास्तव ने ग़ज़ल से शुरुआत की और अपनी कविताओं से शब्दों को भाव व संगीत से बुना, जिससे सभागार में गर्मजोशी, अंतरंगता व सकारात्मक माहौल बना। कविता, भावना व शब्दों की सादगी का यह सत्र जीवंत उत्सव बन गया।
“ओरछा कलम” का भव्य विमोचन
कला, इतिहास व विरासत पर महत्वपूर्ण सत्र में “ओरछा कलम” पुस्तक का औपचारिक विमोचन हुआ। 1977 बैच मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ. विश्वपति त्रिवेदी व उनकी पत्नी मिसेज़ मोना त्रिवेदी द्वारा रचित यह पुस्तक 40 वर्षों में संग्रहीत ओरछा की दीवार चित्रकला के दुर्लभ फोटो प्रस्तुत करती है, जो क्षेत्र की कलात्मक विरासत का जीवंत दस्तावेज़ है। बुंदेलखंड का ऐतिहासिक संदर्भ, ओरछा के महलों-मंदिरों की वास्तुकला व पारंपरिक भित्ति चित्रकला की गहराई खोजती यह पुस्तक आर्ट क्रिटिक आनंद कृष्णन का विशेष दृष्टिकोण व भगवत पुराण की कथाओं का विस्तृत विवेचन भी समेटे हुए है। यह ओरछा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर समकालीन पाठकों के लिए सुलभ बनाती है। फेस्टिवल का यह सत्र सबसे महत्वपूर्ण व अविस्मरणीय सत्रों में उभरा।
आदिवासी कला दीर्घा में हस्तनिर्मित आदिवासी चित्रकला, पारंपरिक टैटू, वस्त्र कला, मिट्टी के बर्तन निर्माण, कठपुतली शो व बारीक आदिवासी आभूषण प्रदर्शित किए गए। चींटी की चटनी बनाने का लाइव प्रदर्शन दर्शकों को आकर्षित करने वाला रहा। इन तत्वों ने आदिवासी समुदायों की रचनात्मकता, कौशल व दैनिक सांस्कृतिक प्रथाओं को जीवंत रूप से प्रदर्शित किया।
“सिनेमा का सार तर्क नहीं, जादू है” — विनय सपूर और राधिका राव
समकालीन भारतीय सिनेमा, संगीत व बदलती तकनीक पर केंद्रित सत्र में विनय सपूर व राधिका राव के साथ संवाद हुआ। सत्र की शुरुआत में दोनों ने अपने करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव व निर्देशित लोकप्रिय गीतों-फिल्मों का ज़िक्र किया। संम तेरा कसम, दगाबाज़ रे, मस्त मस्त दो नैना जैसे लोकप्रिय गीतों के रचनात्मक प्रक्रिया को साझा किया, बताया कि संगीत कहानी का आत्मा कैसे बनता है। चर्चा टीवी विज्ञापनों व सिनेमा में नई तकनीकों पर केंद्रित रही। वक्ताओं ने कहा कि बदलती तकनीक ने सिनेमा को नया आयाम दिया, किंतु मूल भाव वही रहता है। राधिका राव ने स्पष्ट कहा कि फिल्मों को तर्क से ज़्यादा जादू चाहिए। बजट, तकनीक व रचनात्मक स्वतंत्रता के संतुलन पर चर्चा की। दबंग फिल्म के अनुभव साझा करते हुए कहा कि तकनीक बदलती रहती है, भावनाएँ नहीं। युवाओं के लिए सिनेमा, संगीत व रचनात्मकता के प्रति प्रेरणादायक सत्र सिद्ध हुआ।
सफलता का मंत्र: आत्मविश्वास, विशिष्टता व समय का मूल्य
“द विंनिंग फॉर्मूला: 52 प्रिंसिपल्स ऑफ सक्सेस” सत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री के.जे. अल्फांस व विनीत नाहटा ने रुपिंदर बरार के संचालन में सफलता के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। प्रतिबिंब, आत्मविश्वास व सही दिशा चुनने का प्रेरक मंच बना सत्र। वक्ताओं ने प्रतिभा को सफलता का पहला कदम बताया व प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट क्षमता व पहचान पर जोर दिया। युवाओं को “backbone” मज़बूत करने की सलाह दी, अर्थात मूल सिद्धांतों पर अडिग रहना। कहा कि हर मानव अनूठा है—विश्व में आप जैसा कोई और नहीं—इसलिए स्वयं होना सबसे बड़ी ताकत। समय की महत्ता पर चर्चा करते हुए धन को जीवन का साधन बताया। समय बर्बाद करना अपनी क्षमता को नकारना है। कहा कि सच्ची ताकत पद या अधिकार में नहीं, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने में है। मानव मस्तिष्क की अपार क्षमता व सकारात्मक सोच को सफलता का कुंजी बताया। युवाओं के लिए आत्मविश्वास व सार्थक सफलता का प्रेरणा स्रोत बना सत्र।
दास्तान-ए-शंकर: आदि शंकराचार्य का स्तोत्र
अद्वैत चेतना “दास्तान-ए-शंकर” में गूंजी। अंतरंग सभागार में भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल का अंतिम संध्या आध्यात्मिक चेतना, कथावाचन व संगीत का दुर्लभ संगम बना। “दास्तान-ए-शंकर: आदि शंकराचार्य का स्तोत्र” प्रस्तुति में भारती दीक्षित ने दास्तान शैली में शंकराचार्य का जीवन क्रमबद्ध प्रस्तुत किया। जन्म कथा से शुरू कर बचपन, असाधारण प्रतिभा व धर्म के प्रति गहन आस्था को जीवंत कथा में बुना। प्रत्येक चरण में शब्द, भावना व अभिनय का सामंजस्य मंच को चिंतन व प्रतिबिंब का स्थान बना गया। शंकराचार्य का संन्यास, गुरु परंपरा से जुड़ाव व अद्वैत वेदांत प्रसार को संवेदनशीलता से चित्रित किया। युवावस्था में भारत भ्रमण कर संनातन धर्म की बौद्धिक एकता पुनर्स्थापित करने की यात्रा दिखाई। चार पीठों की स्थापना व दार्शनिक वाद-विवाद की कथाएँ प्रभावी रहीं, शंकराचार्य के असाधारण व्यक्तित्व व दूरदर्शिता का बोध कराया। सभागार का वातावरण गहन आध्यात्मिक हो गया।
“बाल साहित्य में बच्चों व शिक्षकों के बीच सामंजस्य ज़रूरी” — मंजरी शुक्ल
बाल साहित्य पर केंद्रित सत्र में वक्ता मंजरी शुक्ल ने कहा कि बाल साहित्य शिक्षकों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बच्चों के लिए। संवेदनशील विषयों को बाल साहित्य में स्थान मिलना चाहिए। ट्रांसजेंडर बच्चे अंशु व उनकी संघर्ष पर साहित्य उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी कहानियाँ सही संदेश पहुँचाने का शक्तिशाली माध्यम बन सकती हैं। मंजरी शुक्ल ने कहा कि बच्चों के लिए कहानियाँ लिखते हुए लेखक पात्रों के भावों में प्रवेश करना पड़ता है। पात्रों के भावों को छूए बिना पाठक कहानी से जुड़ ही नहीं सकता। बाल साहित्य बच्चों को अपनापन देता है, इसलिए बच्चों के बीच बैठकर बच्चों जैसा लिखना चाहिए। शिक्षिका के अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्कूल जीवन पीछे रह जाता है, शिक्षक कभी नहीं। शिक्षक छात्रों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है, इसलिए बाल साहित्य में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण। कई कहानियों से बच्चों व शिक्षकों के बीच सामंजस्य की आवश्यकता स्पष्ट की। रचना समदर के संचालन में सत्र हुआ।
युवा लेखिका वैष्णवी अनंत के साथ संवाद: कल्पना, प्रेरणा व लेखन यात्रा
भारत भवन में तीसरे दिन युवा लेखिका वैष्णवी अनंत के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ। लेखन यात्रा, रचनात्मक सोच व युवा साहित्य पर दृष्टिकोण जानने का अवसर मिला। युवावस्था में साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बना चुकी वैष्णवी ने चार उपन्यास लिखे। जाज़ गैंग अपनी लोकप्रिय कृति बताई जो किशोर पाठकों के लिए है। कंट्रोल अल्ट आर्काइव को हारने वाले से जीतने वाले की प्रेरक कहानी कहा। सीता के चरित्र को भिन्न दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया। रानी लक्ष्मीबाई के साहस व नेतृत्व को वर्तमान छात्रों के लिए प्रेरणा बताया। उनकी पुस्तकों की अच्छी बिक्री से लोकप्रियता झलकती है। अंत में छात्रों को जुनून पहचानकर पूरे आत्मविश्वास से पीछा करने का संदेश दिया।
“अस्वस्थ व्यक्ति को बच्चा पैदा करने का अधिकार नहीं” — डॉ. शिव कुमार सरिन
स्वास्थ्य शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. शिव कुमार सरिन ने कहा कि स्वास्थ्य बिगड़ने पर व्यक्ति जीवनशैली पर पछताता है। प्रत्येक परिवार को फैमिली ट्री तैयार करनी चाहिए ताकि संभावित आनुवंशिक रोगों का पूर्वानुमान हो। उनकी पुस्तक तथ्यों व भावनाओं पर आधारित है। स्पष्ट कहा कि अस्वस्थ माता-पिता होने पर बच्चों के अस्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्चों व युवाओं में गंभीर रोगों के अनुभव साझा करते हुए कहा, “स्वयं अस्वस्थ होकर बच्चा पैदा करना राष्ट्र के भविष्य को कमज़ोर करना है।” स्वास्थ्य शिक्षा 10 वर्ष की स्कूल शिक्षा से ज़्यादा महत्वपूर्ण। सामान्य शिक्षा दायित्व है, स्वास्थ्य शिक्षा जीवन का आधार। अशोक लवासा के संचालन में सत्र।
“साइबरटेक, स्पेस व भू-राजनीति” सत्र
जीपीएस स्पूफिंग, वेनेज़ुएला में अमेरिकी ऑपरेशन, सिंदूर ऑपरेशन के साइबर पहलू, डिजिटल गिरफ्तारी व साइबर स्कैम पर चर्चा हुई। एलटी. जनरल एम. उन्निकृष्णन नायर व विवेक जोहरी अनिरुद्ध सूरी के संचालन में। विवेक जोहरी ने जनवरी 2026 के अमेरिकी “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व” का ज़िक्र किया, जिसमें काराकास का इंटरनेट कनेक्टिविटी बंद कर चीनी-रूसी सैटेलाइट प्रभावित किए। भारत-पाक तनाव में साइबर युद्ध आधुनिक संघर्ष का पैटर्न बन गया। सेना, नौसेना, वायुसेना व खुफिया एजेंसियों के साथ साइबरस्पेस व बाहरी अंतरिक्ष अब रणनीतिक क्षेत्र। “डिजिटल उपनिवेशवाद अपरिहार्य?” प्रश्न उठाया। एलटी. जनरल नायर ने डिजिटल जीवन में कमज़ोरियों पर कहा कि नागरिक प्रौद्योगिकी जागरूकता के अभाव में आसान लक्ष्य। सोशल मीडिया ने समाज बदल दिया। नागरिकों का डेटा क्लाउड में है, जो अपराधियों, आतंकी समूहों व शत्रु राष्ट्रों के लिए सुलभ। राष्ट्रीय व व्यक्तिगत स्तर पर डेटा संरक्षण ज़रूरी। नागरिक आधुनिक युद्धों के दर्शक नहीं, डिजिटल फुटप्रिंट से भागीदार हैं।
फिल्मों में चित्रण से भिन्न है सैन्य जीवन — मेजर मणिक एम. जॉली
वागर्थ सभागार में सैन्य जीवन की वास्तविकताओं पर सत्र। कर्नल संजय पांडे के संचालन में मेजर मणिक एम. जॉली ने युवा भारतीय सेना अधिकारियों की कठिनाइयों, बलिदानों व काउंटर-टेरर ऑपरेशनों के अनुभव साझा किए। मेजर जॉली ने कहा कि सैन्यकर्मियों की वास्तविक कहानियाँ बॉलीवुड फिल्मों से भिन्न हैं। युवा अधिकारियों की चुनौतियाँ व कठोर परिस्थितियों पर बताया। प्रत्यक्ष गोलीबारी में भय महसूस कर सैनिकों के सामने शांत रहने का व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। सिगरेट सुलगाकर सैनिकों से आगे बढ़ने को कहा। कमांडिंग ऑफिसर पर सैनिकों का अटूट विश्वास, जिसके लिए वे मृत्यु तक तैयार। पुस्तक के पात्र वास्तविक या वास्तविकता पर आधारित। सेना भय को शिक्षक बनाती है, नागरिक जीवन से अधिक सीख दिलाती। अनुशासन, दायित्व व साझा कष्ट से व्यक्ति को नेता बनाती। सत्र सैन्य सेवा की सच्ची झलक प्रस्तुत किया।
भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व पर विशेषज्ञों के विचार
कौसर किदवाई के संचालन में “शी द लीडर: वुमेन इन इंडियन पॉलिटिक्स” लेखिका निधि शर्मा के साथ संवाद। नीति निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर जोर। “वर्किंग मदर गिल्ट” पर स्मृति ईरानी व प्रतिभा पाटिल के इंटरव्यू का ज़िक्र। राजनीति में महिलाओं पर पुरुषों से भिन्न मानदंड। बड़े पैमाने पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिए भारत तैयार? शर्मा ने अनिश्चितता जताई। रिज़र्वेशन किताबों तक सीमित, प्रैक्टिस में पुरुष परिवारजन ही शक्ति संभालते। उत्तर-पूर्व क्षेत्र को मुख्यधारा मीडिया में अधिक स्थान की आवश्यकता। लोकसभा-राज्यसभा चुनाव जीतने वाले नेताओं पर आधारित पुस्तक कालानुक्रमिक।
गोल्डन रोड पर संवाद: प्राचीन भारत ने विश्व को कैसे बदला
“द गोल्डन रोड: हाउ एंशेंट इंडिया ट्रांसफॉर्म्ड द वर्ल्ड” पर विशेष वर्चुअल सत्र। विलियम डालरिंपल राघव चंद्रा के साथ। प्राचीन भारत के सभ्यता व वैश्विक योगदान पर चर्चा। ज्ञान, संस्कृति व विचारों से भारत ने विश्व को प्रभावित किया। क्षेत्रीय संस्कृतियों, परंपराओं व सभ्यताओं के अंतर्संबंध। बौद्ध धर्म की भूमिका, भारत से उत्पन्न बौद्ध विचार एशिया तक। कुरुक्षेत्र, यमुना, लंका युद्ध जैसे ऐतिहासिक-पुराणिक संदर्भों से सांस्कृतिक विरासत। धर्म, कर्म, हिंदू धर्म व बौद्ध दर्शन आज भी मार्गदर्शक। युवाओं को संस्कृति, इतिहास व जड़ों को समझने का संदेश।
ईश्वर ने हमें बनाया, मनुष्य बनाए, लेकिन हमने एंग्लो-इंडियन बनाए
एसबीआई रंगदर्शिनी सभागार में विकाश कुमार झा ने “मक्लुस्कीगंज” पुस्तक पर चर्चा। सीमा वर्मा के संचालन में। एंग्लो-इंडियन समुदाय के उत्थान-पतन की कहानी ऐतिहासिक, सामाजिक व मानवीय कोणों से। मक्लुस्कीगंज का वीडियो दर्शकों को स्थान व लोगों से परिचित कराया। अन्य उपन्यासों व एंग्लो-इंडियन समुदाय के राजनीतिक-सामाजिक भागीदारी पर चर्चा। 90% पात्र वास्तविक, कई जीवित। अंत में इलोना घोष की उदास कहानी साझा, रांची में अकेली रहतीं, एंग्लो-इंडियन स्मृति का प्रतीक।
जनरल सुंदरजी: भारत की सेना व राजनीति को आकार देने वाले रणनीतिकार
“जनरल सुंदरजी: ब्रासटैक्स, ब्लू स्टार व बोफोर्स” पर प्रोबल दासगुप्ता का सेमिनार। लेफ्टिनेंट जनरल मिलन नायडू के संचालन में। प्रोबल ने कहा कि भारतीय सेना मालदीव से राजस्थान रेगिस्तान, अरुणाचल से हिमालय तक रक्षा करती। सुंदरजी ने पंजाब बचाया, राजस्थान में पाकिस्तान पर दबाव बनाया। ऑपरेशन ब्लू स्टार में रणनीतिक चतुराई। चीन के कदमों का एक गोली न चलाकर जवाब। हेलीकॉप्टर से बॉर्डर उपकरण तैनाती से आश्चर्य। राजनीतिक परिस्थितियों को आसानी से संभालने की क्षमता।
हिमालय की लोककथाओं में परंपरा, मनोविज्ञान व समाज की गूंज
“हिमालय की लोककथाओं” सत्र में मोना वर्मा व विनीता धोंडियाल भटनागर के बीच संवाद। हिमालयी लोककथाओं की जड़ें व सांस्कृतिक महत्व। लोककथाएँ क्षेत्र के समाज, विश्वास व विश्वदृष्टि का दर्पण। महाभारत से जुड़ी कथाएँ लोक परंपराओं से जीवित। मनोवैज्ञानिक व सामाजिक-मनोवैज्ञानिक दृष्टि से विश्लेषण। नाक काटने जैसी कथाओं से सम्मान, गरिमा व भय की भावनाएँ स्पष्ट।
फ्रेंच साहित्य के प्रमुख आंदोलन व प्रवृत्तियाँ
एसबीआई रंगदर्शिनी सभागार में वर्जिनी बूयक्स प्रशस्ति दुबे के संचालन में। आधुनिकतावाद, सर्रियलिज़्म, अस्तित्ववाद प्रमुख आंदोलन। ऑटोमैटिक राइटिंग नई लेखन शैली। ऑटोफिक्शन का पुनरुत्थान। ट्रॉमा, incest, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, युद्ध, निर्वासन व सामाजिक-राजनीतिक आलोचना। समकालीन फ्रेंच साहित्य सामाजिक-राजनीतिक सुधारों से जुड़ा।
हमने कैसे अपना संविधान गढ़ा
1946 के संविधान सभा में “भारत के हम लोगों ने” ने स्वतंत्रता को औपचारिक अभिव्यक्ति दी। नीरा चंदहोके श्लोक चंद्रा के साथ। समानता, स्वतंत्रता, न्याय व बंधुत्व भारतीय राजनीतिक चेतना में निहित। 1895 के संविधान बिल, 1925 के कॉमनवेल्थ बिल, 1928 के नेहरू ड्राफ्ट। संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता। न्यायपालिका के रचनात्मक व्याख्या से सामाजिक हस्तक्षेप। साइमन कमीशन, धर्मनिरपेक्षता की बहुआयामीता। नेहरू का धर्म निरपेक्ष। बुलडोज़र कार्रवाइयाँ संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध। संविधान हमारी रक्षा करता, अब हमारी बारी।
पर्यावरण संकट में सत्य के साक्ष्य: “टेस्टिमोनी बाय फायर” पर संवाद
एसबीआई रंगदर्शिनी में डॉ. अतुल्य मिश्रा व डॉ. सीमा रायज़ादा का संवाद। ‘पर्यावरण व साहित्य में संकट’। डॉ. मिश्रा की ‘टेस्टिमोनी बाय फायर’ पर्यावरण, समाज व राजनीति के नेक्सस पर। कथा-गैरकथा, वास्तविक पात्र व स्थान। पारिस्थितिकी, वैज्ञानिक पत्रिकाएँ, पर्यावरण के सामाजिक पहलू, सतत विकास, भारत की राजनीति व पर्यावरण सक्रियता।
यूपीएससी पर्वत चढ़ना व सिविल सर्विसेज जीवन
सिविल सर्विसेज तैयारी व संघर्ष पर प्रेरक सत्र। आईएएस सज्जन यादव व के.एम. आचार्य युवाओं से संवाद। सज्जन यादव ने “क्लाइंबिंग माउंट यूपीएससी एंड सिविल सर्विसेज लाइफ” लिखने का तर्क बताया। 10 भाषाओं में अनुदित, 7 सफल उम्मीदवारों की कहानियाँ। हरियाणा के छोटे गाँव से आईएएस। पहले प्रयास में असफलता के बाद समर्पण से सफलता। सिविल सर्विसेज सुरक्षित नौकरी, मान्यता व समाज परिवर्तन का अवसर। घरेलू सहायक के बेटे भारत सिंह, मिन्नू व सिक्किम की अंजली शर्मा (कक्षा 10 में ब्रेन ट्यूमर से अंधी, यूट्यूब से तैयारी कर सफल) की प्रेरक कहानियाँ। आर. परशुराम के संचालन में।
“भारत को चीन पर निर्भरता कम करनी चाहिए” — अशोक कान्था
“भारत-चीन संबंधों का डिकोडिंग” सत्र। अशोक के. कान्था व एलटी. जनरल एस.एल. नरसिम्हा, अम्बरीन खान संचालन। कान्था ने संरचनात्मक समस्याओं पर छोटे-मज़बूत कदम। चीन पर पूर्ण विश्वास नहीं, पाकिस्तान को समर्थन। बॉर्डर समझौतों को मज़बूत करना। मैग्नेट जैसे संसाधनों पर निर्भरता कम। बहुस्तरीय संघर्ष। नरसिम्हा ने एलएसी पर पैट्रोलिंग, तनाव निवारण तंत्र। सीमा पर समझौता नहीं।
मुगल साम्राज्य की सेवा में भी मान सिंह हिंदू व अपने राज्य के राजा बने रहे” — रीमा हूजा
अंतरंग में “राजा मान सिंह: अकबर के प्रिय सेनापति”। रीमा हूजा राघव चंद्रा संचालन। अकबरनामा चित्रों से अकबर-मान सिंह संबंध। अकबर ने पुत्रवत स्नेह। इतिहास लेखन में निष्पक्षता। मान सिंह व प्रताप में पारिवारिक संबंध। मुगल दरबार से जुड़े मान सिंह ने राजपूत-मुगल संस्कृति सम्मान। अफगान क्षेत्रों में विजय। गया, पटना, कोलकाता, सियालकोट में मंदिर-मस्जिद। मथुरा गोविंद देव मंदिर। पठानों से जगन्नाथ पुरी मुक्ति।
प्रत्येक जिले की विशिष्टताओं पर साहित्य की आवश्यकता
“बेहतर समाज निर्माण में संस्कृति की भूमिका” में प्रभात तिवारी ने मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर। भौगोलिक व सांस्कृतिक हृदय। किले, मंदिर, लोककला, परंपराएँ। सांस्कृतिक चेतना समाज सुधार में महत्वपूर्ण। साहित्य चेतना जीवित रखने का माध्यम। राज्य के जिलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर विशिष्टताएँ बताईं। मोरैया के प्रह्लाद सिंह सिकरवार ने चंबल, अनूपपुर के संदीप शिवहरे ने आदिवासी संस्कृति, शाजापुर के राजेंद्र ने धार्मिक-ऐतिहासिक विरासत। मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले की विशिष्टताओं पर साहित्य रचना का आह्वान। ब्रजेश राजपूत संचालन।
एफ.एन. सौजा की कलात्मक दुनिया में कामुकता, विद्रोह व ईश्वर
एसबीआई रंगदर्शिनी में “सेक्शुअलिटी, रिबेलियन एंड गॉड इन द वर्क्स ऑफ एफ.एन. सौजा”। जानिता सिंह डॉ. मीरा दास संचालन। सौजा की कृतियाँ गहन व दार्शनिक। शारीरिक शक्ति, सौंदर्य बोध, अश्लीलता, अशिष्टता। देवी महात्म्य, स्त्री तत्त्व, देवी प्रतीकवाद। ईश्वर, विद्रोह व मानव मन की जटिलताओं का निर्भीक चित्रण। उद्धरण: “रिनेसाँ ने सुंदरता दिखाई, मैंने उनके भीतर नरक दिखाया—वह सुंदर था।” सौजा ने स्त्री रूप से शुरुआत। “हम सब फेमिनिस्ट होने चाहिए”।
रविन्द्र सोनी
