माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर जिले के विभिन्न गंगा घाटों पर आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार की अहले सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। आस्था और विश्वास के इस महापर्व पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। शहर के सभी आठ गंगा घाटों पर एसडीआरएफ और प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम तैनात की गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के गंगा घाटों पर स्थानीय गोताखोरों को सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाया गया।
माघी पूर्णिमा को लेकर सोझीगंगा घाट, बबुआ घाट, कंकड़ घाट और लल्लू पोखर घाट सहित कई प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कष्टहरणी गंगा घाट बंद रहने के कारण बबुआ गंगा घाट पर सबसे अधिक भीड़ उमड़ी, जहां सुबह से लेकर दिन भर श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा।
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु दान-पुण्य और पूजा-अर्चना करते नजर आए। कई श्रद्धालु स्नान के उपरांत सीता कुंड और सीताचरण जाकर माता सीता के दर्शन के लिए भी पहुंचे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व माना जाता है।
एनडीआरएफ के सब-इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार ने बताया कि माघी पूर्णिमा के अवसर पर सबसे अधिक भीड़ बबुआ गंगा घाट पर देखी गई। उन्होंने बताया कि अब तक करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान कर चुके हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी घाटों पर बांस से बैरिकेडिंग की गई है, ताकि श्रद्धालु गहरे पानी में जाने से बच सकें। इसके अलावा एसडीआरएफ के 16 जवान मोटर बोट के जरिए लगातार गंगा में निगरानी कर रहे हैं।
गंगा स्नान के लिए पहुंचीं महिला श्रद्धालुओं ने बताया कि माघी पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और इस दिन दान-पुण्य का विशेष धार्मिक महत्व होता है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच श्रद्धालुओं ने सुरक्षित वातावरण में स्नान और पूजा-अर्चना संपन्न की।
