सीनियर अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद मोहाली की एडिशनल जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए हैं। मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत में जमानत बांड से जुड़ी सुनवाई हुई। लगभग डेढ़ घंटे चली सुनवाई के बाद अदालत ने मजीठिया को दो लाख रुपये के श्योरिटी बॉन्ड भरने के बाद जमानत पर रिहा करने के निर्देश दिए।
मजीठिया के वकील एच.एस. धनुआ ने जानकारी देते हुए बताया कि विजिलेंस विभाग की ओर से अदालत में एक आवेदन दायर किया गया था, जिसमें जमानत के लिए कुछ शर्तें लगाने की मांग की गई थी। इस आवेदन में यह भी कहा गया था कि मजीठिया को पंजाब आने से रोका जाए, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा उनका पासपोर्ट मोहाली अदालत में जमा करवाने की भी मांग की गई थी।
अदालत ने पासपोर्ट से संबंधित शर्त को स्वीकार करते हुए कहा कि मजीठिया का पासपोर्ट फिलहाल पहले से ही जमा है और जब वह संबंधित अदालत से रिलीज होगा तो उसे मोहाली अदालत में जमा करवाना होगा। वहीं अदालत ने मजीठिया के पंजाब आने पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मजीठिया पंजाब के निवासी हैं और भारतीय संविधान के तहत उन्हें देश में कहीं भी आने-जाने का अधिकार है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेंगे, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
वहीं विजिलेंस की ओर से पेश वकील फैरी सोफत और पीआईपी सिंह ने कहा कि वे अदालत का लिखित आदेश मिलने तक इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला पहले से ही पंजाब की राजनीति में काफी चर्चित रहा है और आने वाले समय में इसकी कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
