पंजाब में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा ‘गन कल्चर’ (हथियारों के महिमामंडन) को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस और गृह विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में अब तक जारी किए गए सभी हथियार लाइसेंसों की व्यापक स्तर पर समीक्षा की जाए।
अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर शिकंजा मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई लाइसेंस धारक किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में लिप्त पाया जाता है, या किसी लाइसेंस के जारी होने में प्रक्रियात्मक चूक हुई है, तो उसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लाइसेंसों की जांच के दौरान व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड और उसकी वर्तमान गतिविधियों का बारीकी से सत्यापन किया जाए।
नियमों में कड़ाई और सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक राज्य सरकार ने हथियारों के संबंध में कुछ कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:
- हथियारों का प्रदर्शन: सोशल मीडिया, सार्वजनिक कार्यक्रमों, धार्मिक स्थलों या विवाह समारोहों में हथियारों के प्रदर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- हिंसा का महिमामंडन: गानों या फिल्मों के माध्यम से हिंसा और हथियारों को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) की जाएगी।
- हवाई फायरिंग: शादी-ब्याह या अन्य आयोजनों में ‘हर्ष फायरिंग’ (Celebratory Firing) को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है, जिससे दूसरों की जान को खतरा हो।
- नया लाइसेंस: भविष्य में कोई भी नया हथियार लाइसेंस तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक कि जिला मजिस्ट्रेट (DC) व्यक्तिगत रूप से संतुष्ट न हों कि लाइसेंस की आवश्यकता अत्यंत अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब की धरती गुरुओं और पीरों की धरती है, यहाँ नफरत और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। राज्य सरकार पंजाब की शांति और आपसी भाईचारे को भंग करने वाले किसी भी तत्व को बख्शने के मूड में नहीं है।
