भारत सरकार ने आयकर नियमावली 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो अगले महीने की पहली तारीख से प्रभावी होगी। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य नियमों की संख्या कम करके कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सख्त खुलासे के माध्यम से अनुपालन को बढ़ाना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, ये नियम आयकर अधिनियम 2025 के प्रावधानों को लागू करते हैं, जो पुरानी प्रक्रियाओं की जगह लेंगे और इसमें नई परिभाषाओं के साथ-साथ रिपोर्टिंग तंत्र को भी शामिल किया गया है। नए नियमों के तहत अब कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे शेयर रजिस्टर बनाए रखें, आम बैठकें आयोजित करें और लाभांश का भुगतान केवल भारत के भीतर ही करें, जिससे लाभांश वितरण पर घरेलू नियंत्रण मजबूत होगा।
इसके साथ ही, स्टॉक एक्सचेंज अनुपालन को भी कड़ा किया गया है। अब एक्सचेंजों को सात वर्षों तक ऑडिट ट्रेल सुरक्षित रखना होगा और लेनदेन के रिकॉर्ड को हटाने पर रोक रहेगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए संशोधित लेनदेन की मासिक रिपोर्ट जमा करना भी आवश्यक होगा। सीमा पार कराधान के मामले में कर अधिकारियों को अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं, जिससे वे अनिवासी आय के आकलन के लिए वैश्विक लाभ अनुपात या अन्य उचित तरीकों का उपयोग कर सकेंगे। जटिल मामलों जैसे डिबेंचर कन्वर्जन और क्रॉस-बॉर्डर रीस्ट्रक्चरिंग के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, जीरो-कूपन बॉन्ड के लिए एक नया ढांचा पेश किया गया है जिसके तहत जारी करने से तीन महीने पहले आवेदन और दो एजेंसियों से निवेश-ग्रेड रेटिंग अनिवार्य होगी। कर्मचारियों को मिलने वाले आवास के लिए कर छूट अब शहर की आबादी और वेतन स्तर जैसे मानकों पर आधारित होगी। कुल मिलाकर, यह नई नियमावली कराधान प्रणाली में डिजिटलीकरण, मानकीकरण और पारदर्शिता लाने पर केंद्रित है।
