भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यम से लंबी अवधि में ब्याज दरें कम रहने की संभावना है। उन्होंने इस सकारात्मक दृष्टिकोण का श्रेय कम होती महंगाई और देश की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी स्थिति (मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स) को दिया। गवर्नर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को “बेहद मजबूत, लचीला और ठोस” बताते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान नीतिगत रुख तटस्थ है, जिससे भविष्य में किसी भी दिशा में बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि लंबे समय तक ब्याज दरों के कम रहने की प्रबल संभावना है।
आर्थिक विकास के मोर्चे पर आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसे को दर्शाता है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि सरकार, आरबीआई और अन्य संस्थानों द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधार और समन्वित प्रयास महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए विकास को गति दे रहे हैं। महंगाई के संबंध में केंद्रीय बैंक ने साल 2026-27 के लिए 4.6 प्रतिशत का अनुमान लगाया है, जो 2 से 6 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के भीतर है। इससे पहले दिन में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने वैश्विक तनावों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता को देखते हुए रेपो रेट को सर्वसम्मति से 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया।
गवर्नर ने मौद्रिक संचरण (मॉनेटरी ट्रांसमिशन) पर जानकारी देते हुए बताया कि बैंकों ने रेपो रेट में हुई कटौती का एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया है, जिसे उन्होंने संतोषजनक बताया। रुपये की स्थिति और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव पर स्पष्टीकरण देते हुए मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम केवल अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए थे और ये स्थायी नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि वैश्विक झटकों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जैसे जोखिमों के बावजूद भारत की आर्थिक नींव बहुत मजबूत है, जो आने वाले समय में निरंतर आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगी।
