पिथौरागढ़ जिले में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विशेष रूप से नशे के बढ़ते प्रभाव और बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला एवं बाल विकास विभाग के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, जिन्हें इन समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले को एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज के रूप में स्थापित करना है, जहां युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त से दूर रहे और सामाजिक कुप्रथाओं का अंत हो।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि समाज में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल युवाओं के भविष्य को अंधकारमय बना रही है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया ताकि जमीनी स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई पूरी तरह प्रभावी हो सके। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के हर गांव में नशा मुक्ति के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आमजन और विशेषकर अभिभावकों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूल और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन मिल सके और उन्हें इन हानिकारक प्रवृत्तियों से दूर रखा जा सके।
बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी ने विशेष सतर्कता बरतने की बात कही और अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसी घटनाओं की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को इस दिशा में अपनी भूमिका सक्रियता से निभाने को कहा है ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके। जिलाधिकारी ने साफ कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का यह सख्त कदम जिले को एक नशा मुक्त और कुरीति मुक्त समाज बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो सके और जिले में स्वस्थ सामाजिक वातावरण का निर्माण हो सके।
