दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सोमवार को भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों पर महत्वपूर्ण चर्चा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों देशों को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, जो वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न होना वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और औद्योगिक सामग्री की सप्लाई चेन में गंभीर व्यवधान पैदा कर सकता है।
दोनों देशों की ऊर्जा निर्भरता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया और भारत दोनों ही अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेषकर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लिए बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर हैं। इसलिए, यह अनिवार्य हो जाता है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, जो न केवल आर्थिक हितों के लिए बल्कि दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बेहद आवश्यक है। राष्ट्रपति ली ने भरोसा दिलाया कि दक्षिण कोरिया इस क्षेत्र में भारत के साथ निरंतर निकट संपर्क बनाए रखेगा ताकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन सुरक्षित और निर्बाध बना रहे। साथ ही, उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक मंचों पर इस साझा प्रतिबद्धता को मजबूती देने के लिए समन्वित प्रयास करेंगे।
सप्लाई चेन और औद्योगिक सहयोग के विस्तार पर बात करते हुए राष्ट्रपति ली ने आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने पुरानी आयात-निर्भरता को समाप्त करने की दिशा में एक नई कार्ययोजना साझा की, जिसके तहत दक्षिण कोरिया की उन्नत तकनीक को भारत के माइनिंग और रिफाइनिंग उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि एक स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई चेन का निर्माण किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा क्षेत्र, शिपबिल्डिंग और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार खोलने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ली ने कहा कि अब समय आ गया है कि पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों से आगे बढ़कर दोनों देश इन नए और भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में मिलकर विकास करें। यह महत्वपूर्ण बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आगामी द्विपक्षीय शिखर बैठक से ठीक पहले आया है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के एक नए युग में प्रवेश करने की उम्मीद जताई जा रही है।
