बुलियन बाजार में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों पर लगातार दबाव बना रहा। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई।
फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखा। हालांकि, केंद्रीय बैंक के लगभग आधे नीति-निर्माताओं ने संकेत दिए कि इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी तेजी देखी गई। इसका सीधा असर बुलियन बाजार पर पड़ा, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोना और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश साधनों की मांग कमजोर पड़ जाती है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में सप्ताह के दौरान 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,47,203 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं जुलाई डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स 5.3 प्रतिशत टूटकर 2,33,185 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में अगस्त कॉन्ट्रैक्ट वाला गोल्ड फ्यूचर्स सप्ताहभर में 1.5 प्रतिशत से अधिक फिसलकर करीब 4,173 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ। वहीं जुलाई कॉन्ट्रैक्ट वाला सिल्वर फ्यूचर्स 4.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक ब्याज दरों और डॉलर इंडेक्स में नरमी नहीं आती, तब तक सोना और चांदी दबाव में बने रह सकते हैं।
