कॉन्क्लेव के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों के भविष्य पर विचार साझा करते केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी। (फोटो साभार: एक्स/ट्विटर)
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत कॉन्क्लेव 2026’ में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत भरे संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं या उनमें गिरावट आती है, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति में हो रहे विस्तार के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय काफी अनुकूल रहने की उम्मीद है।
हाल के दशकों के सबसे गंभीर वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों का सामना करने के बाद भी भारत का ईंधन संकट से सुरक्षित निकल जाना एक बड़ी नीतिगत सफलता है। इस रणनीति के तहत उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले सीधे प्रभावों को नियंत्रित किया गया है:
- उत्पादन क्षमता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: घरेलू संकट को टालने के लिए रिफाइनरियों को उच्च मूल्य वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बजाय रसोई गैस (LPG) को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इसके परिणामस्वरूप देश की एलपीजी उत्पादन क्षमता बेहद कम समय में लगभग 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गई, जिसने देश के 33 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की।
- टैक्स कटौती से मिली राहत: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बावजूद, पिछले चार वर्षों में भारत में ईंधन की दरें वैश्विक स्तर पर सबसे कम बनी रही हैं। केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के बजाय खुद वित्तीय घाटे को झेला और तीन चरणों में उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती कर कीमतों को नियंत्रित रखा।
- आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उत्पन्न तनाव के दौरान प्रभावी कूटनीति के जरिए ईरान, ओमान, कतर और यूएई जैसे देशों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया गया, जिससे भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिला और ईंधन की आपूर्ति में एक दिन की भी रुकावट नहीं आई।
भारत ने अपनी पुरानी और पारंपरिक ऊर्जा निर्भरता को बदलते हुए एक बेहद आक्रामक और विविधीकृत (Diversified) कूटनीतिक रुख अपनाया है। पहले भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए केवल 21 देशों पर निर्भर था, लेकिन हालिया संकटों के बीच इस दायरे को बढ़ाकर करीब 40 देशों तक पहुंचा दिया गया है। खाड़ी देशों के पारंपरिक आयात के अलावा अब भारत अमेरिका, अल्जीरिया और अर्जेंटीना जैसे नए बाजारों से भी एलपीजी और कच्चे तेल की सोर्सिंग कर रहा है।
दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपस्ट्रीम ऊर्जा क्षेत्र (Upstream Energy Sector) में बड़े विनियामक सुधार किए हैं। इसके तहत पुराने पेट्रोलियम कानूनों में संशोधन किया गया है, अन्वेषण (Exploration) के लिए पहले से प्रतिबंधित रहे क्षेत्रों को खोला गया है और तेल व गैस की खोज में विदेशी व घरेलू निवेश को आकर्षित करने के लिए आसान नीतिगत सुधार लागू किए गए हैं। इन्हीं समयबद्ध हस्तक्षेपों का नतीजा है कि वैश्विक स्तर पर मचे भारी ऊर्जा संकट के दौर में भी देश का एक भी रिटेल फ्यूल आउटलेट (पेट्रोल पंप) ड्राई नहीं हुआ।
