भारत सरकार ने देश की बैंकिंग प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने और इसे ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप ढालने के लिए ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ का गठन किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में इस समिति के गठन की घोषणा की थी।
यह समिति भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, वित्तीय रूप से समावेशी और आधुनिक बनाने के लिए संरचनात्मक, संस्थागत, नियामक एवं कानूनी सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी। समिति को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है।
समिति का संक्षिप्त परिचय (Committee Overview)
- समिति का नाम: विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति
- अध्यक्ष: सुरेश एन. पटेल (पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त)
- सदस्य: शिरीष चंद्र मुर्मू (उप-गवर्नर, RBI), पद्मजा चुंदरू (पूर्व MD & CEO, इंडियन बैंक), एन. एस. विश्वनाथन (पूर्व उप-गवर्नर, RBI)
- सदस्य सचिव: संयुक्त सचिव (बैंकिंग), वित्तीय सेवा विभाग
- कार्यकाल: 6 महीने
समिति के प्रमुख कार्य और प्राथमिकताएं
- वैश्विक मानक और प्रुडेंशियल मानदंड: समिति वर्तमान बैंकिंग प्रथाओं का आकलन कर भारतीय बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर रोडमैप तैयार करेगी।
- नियामक व कानूनी ढांचे की समीक्षा: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और सहकारी बैंकों सहित पूरे बैंकिंग क्षेत्र की दक्षता बढ़ाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को सुगम बनाने के लिए कानूनों में जरूरी बदलावों की सिफारिश की जाएगी।
- दीर्घकालिक पूंजी और निजी निवेश: विकास वित्तीय संस्थानों (DFIs) और NBFCs की भविष्य की पूंजी आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत विकल्प सामने आ सकें।
- डिजिटल इनोवेशन और AI को बढ़ावा: बैंकिंग सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल नवाचार को अपनाने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य के अनुकूल कार्यबल तैयार करने की रणनीति बनाई जाएगी।
- प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) की समीक्षा: प्राथमिकता क्षेत्र ऋण ढांचे और ‘लीड बैंक योजना’ का पुनर्मूल्यांकन कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि क्रेडिट का वितरण समावेशी, संतुलित और डेटा-आधारित हो।
