वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर में अप्रैल के महीने में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 8.30 प्रतिशत (प्रोविजनल) पर पहुंच गई, जबकि इससे पिछले महीने यानी मार्च में यह आंकड़ा मात्र 3.88 प्रतिशत था। मंत्रालय ने इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से खनिज तेल, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बुनियादी धातुओं और अन्य विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया है।
विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई दर 9.17 प्रतिशत रही, जबकि ईंधन और बिजली (Fuel and Power) क्षेत्र में सबसे अधिक 24.71 प्रतिशत की महंगाई देखी गई। विनिर्मित उत्पादों (Manufacturing Products) के मामले में यह दर 4.62 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि खाद्य उत्पादों की थोक महंगाई में अपेक्षाकृत नरमी बनी हुई है, जो अप्रैल में 2.31 प्रतिशत रही। विशेष रूप से क्रूड पेट्रोलियम की कीमतों में सालाना आधार पर 88.06 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया, वहीं एलपीजी की महंगाई दर 10.92 प्रतिशत दर्ज की गई।
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई (CPI) के मोर्चे पर भी मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 3.48 प्रतिशत रही, जो मार्च में 3.40 प्रतिशत के स्तर पर थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 3.74 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.16 प्रतिशत रही। खाद्य महंगाई दर की बात करें तो यह मार्च के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.20 प्रतिशत हो गई है। राज्यों की स्थिति देखें तो तेलंगाना 5.81 प्रतिशत के साथ महंगाई के मामले में शीर्ष पर रहा, जिसके बाद आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और राजस्थान का स्थान रहा। इन सबके बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने रबी की अच्छी फसल और बेहतर खाद्य आपूर्ति की उम्मीद जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा है।
