आर्थिक और ईंधन आपूर्ति की चुनौतियों से जूझ रहे पड़ोसी देश श्रीलंका की मदद के लिए भारत एक बार फिर संकटमोचक बनकर सामने आया है। मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष के कारण श्रीलंका में ईंधन की आपूर्ति बाधित हो रही थी, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत के इस सकारात्मक और त्वरित रुख के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और वहां के अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति दिसानायके ने सोशल मीडिया पर व्यक्त की कृतज्ञता
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत की इस सहायता की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने पीएम मोदी को मध्य-पूर्व के तनावपूर्ण हालातों के कारण श्रीलंका को हो रही फ्यूल सप्लाई (ईंधन आपूर्ति) की समस्याओं से अवगत कराया था।
राष्ट्रपति ने लिखा, “भारत ने हमारी पुकार पर तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और इसके लिए मैं उनका अत्यंत शुक्रगुजार हूं। शनिवार को कोलंबो में 38,000 मीट्रिक टन (MT) ईंधन की खेप पहुंच गई है।” उन्होंने इस संकट काल में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पूर्ण सहयोग का भी विशेष रूप से उल्लेख किया और उनका धन्यवाद किया।
‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी की मिसाल
श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) के सांसद और पूर्व मंत्री नमल राजपक्षे ने भी भारत की इस सहायता की सराहना की। उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों ने एक बार फिर समय पर ईंधन की शिपमेंट भेजकर अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले) नीति को साबित किया है।
राजपक्षे ने कहा, “भारत हमेशा संकट के समय श्रीलंका के लिए सबसे पहले खड़ा रहा है। चाहे वह जरूरी वस्तुओं की सप्लाई हो या बड़ी आर्थिक मदद, भारत ने हमेशा अपना पड़ोसी धर्म पूरी शिद्दत से निभाया है। एक क्षेत्र के तौर पर यह आवश्यक है कि सभी देश क्षेत्रीय बेहतरी के लिए रणनीतिक साझेदार के रूप में मिलकर काम करें।”
भारत के ‘एक्साइज ड्यूटी’ मॉडल को अपनाने की सलाह
ईंधन संकट के समाधान के साथ-साथ नमल राजपक्षे ने श्रीलंका सरकार को भारत के आर्थिक मॉडल से सीख लेने की भी सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रीलंका को भारत के ‘विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क’ (Special Additional Excise Duty) जैसे मॉडल पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने एक्साइज ड्यूटी केवल तुरंत कीमतें कम करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि बाजार को स्थिर करने के लिए कम की है। इससे वैश्विक तेल कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान घरेलू कीमतों में अचानक होने वाली भारी बढ़ोतरी को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका को भी मार्केट स्टेबिलिटी के लिए इसी तरह के दूरगामी कदम उठाने चाहिए।
भारत द्वारा भेजी गई 38,000 मीट्रिक टन ईंधन की यह खेप श्रीलंका के लिए मौजूदा ऊर्जा संकट में बड़ी राहत लेकर आई है। यह न केवल दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की एक जिम्मेदार और भरोसेमंद बड़े भाई की भूमिका को भी पुख्ता करता है।
