एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाज कल से अपने अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। उलानबाटार में आयोजित हो रही यह प्रतियोगिता भारतीय मुक्केबाजी के लिए इस साल की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौती मानी जा रही है। इस टूर्नामेंट को इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी के प्रदर्शन के आधार पर आने वाले बड़े बहु-खेल आयोजनों के लिए भारतीय खिलाड़ियों की स्थिति मजबूत होगी।
इस वर्ष भारतीय मुक्केबाजी का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहने वाला है। आगे चलकर खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल जैसे बड़े मंचों पर उतरना है। ऐसे में एशियाई चैंपियनशिप खिलाड़ियों के लिए न केवल अपनी वर्तमान फॉर्म साबित करने का अवसर है बल्कि चयन प्रक्रिया में मजबूत दावेदारी पेश करने का भी महत्वपूर्ण मंच है।
इस प्रतियोगिता की अहमियत इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की चयन नीति के अनुसार इस चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले मुक्केबाजों को सीधे कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए क्वालीफिकेशन का लाभ मिलेगा। यानी यहां का हर मुकाबला खिलाड़ियों के लिए केवल पदक की लड़ाई नहीं बल्कि अगले बड़े टूर्नामेंटों में जगह सुनिश्चित करने का भी अवसर होगा।
भारतीय टीम पिछले 15 दिनों से मंगोलिया में तैयारी कर रही है। इस दौरान खिलाड़ियों ने बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया, जहां विभिन्न देशों के मुक्केबाजों के साथ स्पैरिंग सत्र आयोजित किए गए। इस तरह की तैयारी से भारतीय खिलाड़ियों को अलग-अलग शैली के मुक्केबाजों के खिलाफ रणनीति बनाने का अनुभव मिला है। कोचिंग स्टाफ का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास से खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता और मानसिक तैयारी दोनों मजबूत हुई हैं।
महिला वर्ग में भारत की सबसे बड़ी उम्मीदें लवलीना बोर्गोहेन पर टिकी होंगी, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार भारत का नाम रोशन किया है। उनके साथ निकहत ज़रीन भी भारतीय चुनौती को मजबूती देंगी। निकहत अपनी तेज तकनीक और आक्रामक मुक्केबाजी के लिए जानी जाती हैं और बड़े मुकाबलों में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर चुकी हैं।
महिला टीम में मिनाक्षी हुडा और जैस्मिन लेम्बोरिया भी अहम भूमिका निभाएंगी। दोनों मुक्केबाज हाल के महीनों में लगातार प्रशिक्षण शिविरों का हिस्सा रही हैं और चयनकर्ताओं को उम्मीद है कि वे एशियाई स्तर पर भारत के लिए मजबूत परिणाम ला सकती हैं।
पुरुष वर्ग में भारत की नजर जदुमणि सिंह, सचिन सिवाच और नरेंद्र बेरवाल पर रहेगी। इन खिलाड़ियों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का विश्वास जीता है। खास तौर पर युवा मुक्केबाजों के लिए यह टूर्नामेंट अपने करियर को नई दिशा देने वाला मंच माना जा रहा है।
भारतीय दल के लिए यह प्रतियोगिता सिर्फ पदक जीतने का लक्ष्य नहीं बल्कि आने वाले दो वर्षों की बड़ी खेल रणनीति का हिस्सा भी है। कोचिंग स्टाफ चाहता है कि खिलाड़ी यहां से आत्मविश्वास लेकर आगे के बड़े टूर्नामेंटों में उतरें।
मंगोलिया की परिस्थितियों में पिछले दो सप्ताह से अभ्यास कर रही भारतीय टीम अब मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार मानी जा रही है। खिलाड़ियों के फिटनेस स्तर, स्पैरिंग अनुभव और तकनीकी तैयारी को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि भारत इस बार एशियाई चैंपियनशिप में मजबूत प्रदर्शन कर सकता है।
