कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में दुनिया भर से आए अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक चुनौतियों के बीच देशों की आर्थिक मजबूती बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन के दौरान भारत की विकास संभावनाओं, वैश्विक व्यापार व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
स्वीडिश अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने सम्मेलन के बढ़ते प्रभाव की सराहना करते हुए कहा कि कोविड-19 के बाद भारत की विकास दर बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने सचेत किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा व आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा है, जिससे नीति निर्माताओं के समक्ष विकास गति बनाए रखने की चुनौती है।
ब्राजील के क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के कार्यकारी निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने जलवायु परिवर्तन को दुनिया का सबसे बड़ा साझा जोखिम बताया। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों और बढ़ते व्यापारिक संबंधों के जरिए जलवायु संकट व सतत विकास के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने कौटिल्य कॉन्क्लेव को शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का जिक्र करते हुए कहा कि अनिश्चितता के इस दौर में एफटीए नियम-आधारित आर्थिक स्थिरता प्रदान करते हैं।
जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकॉनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने कहा कि चीन के साथ जटिल संबंधों के बीच जापानी उद्योग भारत को एक दीर्घकालिक विनिर्माण केंद्र और संभावनाओं से भरे बाजार के रूप में देख रहे हैं। भारत की जनसांख्यिकीय ताकत और आर्थिक विस्तार विदेशी निवेशकों को लगातार आकर्षित कर रहा है।
