विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज इस बात पर जोर दिया कि रूस एक ऐसा देश है, जो भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर संकट के समय हर कदम पर साथ खड़ा रहा। नई दिल्ली में 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के अधिकांश देशों ने भारत के पड़ोसी सैन्य शासन का समर्थन करना बेहतर समझा, तब रूस ही एक ऐसा देश था जिसके साथ भारत के संबंध बेहद मजबूत रहे। उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंध आज भी उसी ऐतिहासिक विरासत से आकार ले रहे हैं।
डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि समय के साथ दोनों देशों का द्विपक्षीय रिश्ता केवल इतिहास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका काफी विस्तार हुआ है। आज यह एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का रूप ले चुका है। इसमें सैन्य, परमाणु और अंतरिक्ष क्षेत्र के सहयोग के साथ-साथ बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश भी शामिल है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा साफ रहा है—भारत इस युद्ध का अंत देखना चाहता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस समस्या का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत के जरिए ही संभव है।
उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के महीनों में भारत केवल सलाह देने से आगे बढ़कर अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत ने इस सिलसिले में रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत की है और काला सागर में जहाजों की सुरक्षा (Black Sea Safety of Shipping) से जुड़ी पहलों के माध्यम से समाधान में मददगार बनने का प्रयास कर रहा है।
