उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से प्रदेश के 100 विकास खंडों में स्थापित किए जा रहे महिला शक्ति केंद्रों का शुभारंभ किया। हयात रीजेंसी लखनऊ में आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने बटन दबाकर इस योजना की शुरुआत की। प्रथम चरण में प्रदेश के 100 विकास खंडों में महिला शक्ति केंद्र संचालित किए जाएंगे।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने महिला शक्ति केंद्र का प्रतीक चिह्न जारी किया, साथ ही इसके कार्यों की निगरानी के लिए तैयार किए गए डिजिटल प्रबंधन तंत्र का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में एक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पहल है, जिसे प्रारंभिक रूप से 100 विकास खंडों में आरंभ किया जा रहा है और इसे हर हाल में सफल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि महिला शक्ति केंद्रों की स्थापना के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को अपने कार्य का अभिन्न हिस्सा बनाया है। यह पहल लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने तथा वर्ष 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है कि विकास तभी संभव है जब प्रत्येक महिला सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बने। इसी सोच के तहत चयनित 100 विकास खंडों में महिला शक्ति केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। आगे चलकर चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी विकास खंडों में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनका संचालन संकुल स्तरीय संघों द्वारा किया जाएगा।
सरकार ने महिला शक्ति केंद्रों के सफल संचालन के लिए प्रत्येक विकास खंड में कम से कम 200 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित की है। इसके लिए प्रति केंद्र 1 लाख 50 हजार रुपये की राशि फर्नीचर, संगणक, मुद्रक, विद्युत बैकअप, अलमारी, सूचना पट्ट और अन्य आवश्यक सामग्री हेतु निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त कार्यालय किराया, बिजली, पानी, रखरखाव, लेखन सामग्री और आपातकालीन सहायता के लिए प्रति वर्ष 1 लाख 16 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।
महिला शक्ति केंद्रों का संचालन संकुल संघ द्वारा चयनित दो से तीन महिलाओं के माध्यम से किया जाएगा। ये केंद्र ग्रामीण महिलाओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद मंच के रूप में कार्य करेंगे, जहां उन्हें सामाजिक, कानूनी और आर्थिक अधिकारों से संबंधित मार्गदर्शन मिलेगा। इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, पुलिस विभाग और मिशन शक्ति जैसी योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित कर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहायता दी जाएगी।
इन केंद्रों के माध्यम से पंचायतों और सामुदायिक संस्थाओं के सहयोग से महिलाओं में समान अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी। ग्राम संगठनों के साथ समन्वय बनाकर ग्राम पंचायत विकास योजना के अंतर्गत महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान भी किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए संचालित होंगे, जिससे महिलाएं बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं सामने रख सकेंगी। यहां उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनी जाएगी और समाधान के लिए उचित सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और समाज में उनकी भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।
