स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि महिलाओं की स्थिति में सुधार के बिना विश्व का कल्याण नहीं हो सकता। जब नारी कदम बढ़ा लेती है तो पूरा परिवार आगे बढ़ता है। गांव आगे बढ़ता है और राष्ट्र सशक्त होता है।
सनातन संस्कृति में नारी को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वह शिव भी है और शक्ति भी है। सृष्टि के आरंभ से नारी को सृजन, सम्मान और शक्ति का प्रतीक माना गया है। भारत की नारी दया, करुणा, ममता और प्रेम की पवित्र मूर्ति है। नारी की समृद्धि में ही देश और प्रदेश की समृद्धि निर्भर है। सशक्त नारी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। हमारी मातृ शक्ति को निरंतर समृद्ध बनाए रखना हमारा सामूहिक कर्तव्य है। उन्हें समानता का अधिकार देना हमारी जिम्मेदारी है। नारी शक्ति को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के प्रयासों में मध्यप्रदेश का उदाहरण विशेष उल्लेखनीय है। देश में महिला सशक्तिकरण की सर्वाधिक योजनाएं मध्यप्रदेश में संचालित हैं। बेटी के जन्म से लेकर हर स्तर पर सुरक्षा चक्र के रूप में उनके लिए कम से कम एक योजना उपलब्ध है। मध्यप्रदेश देश में महिला सशक्तीकरण का आदर्श माडल बनकर उभरा है।
नारी शक्ति ने टोल-नाकों का संचालन करने, पंचायतों में विकास कार्यों का नेतृत्व करने से लेकर स्टार्ट-अप शुरू करने, लखपति दीदी बनने, द्रोन दीदी बनने के अलावा कला-संस्कृति, खेल, उदयमिता और शासन-प्रशासन जैसे क्षेत्रों पुरूष-प्रधानता वाले क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं को हर प्रकार से अधिकारसंपन्न बनाने में मध्यप्रदेश ने आदर्श राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है। महिला सशक्तिकरण के नवाचारी रणनीतियों को अन्य प्रदेशों ने किसी न किसी रूप में अपने यहां लागू किया है। नारी शक्ति को आगे बढ़ाने की योजनाओं के लिए देश में सबसे पहली बार जेंडर बजट बनाने का काम मध्यप्रदेश ने शुरू किया था। महिला सशक्तिकरण के लिए बजट 32,730 करोड़़ रूपये पहुंच गया है।
आज देश बदल रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में नया इतिहास बन रहा है। चारों तरफ महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। वे पुरुषों से पीछे नहीं है। आज की नारी जवाबदारी से व्यावसायिक दुनिया में जितनी सफल हो रही है उतनी ही कुशलता से अपनी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी भी निभा रही है। पुरुषों के मुकाबले वे कई जिम्मेदारियां एक साथ निभाती है। मां, बहन, बेटी, बहू सब जिम्मेदारियां एक साथ निभाने में वे सक्षम है।
महिला सशक्तिकरण कोई नई बात नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयास होते रहे हैं। जब से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश का नेतृत्व सम्हाला है महिलाओं को सम्मान और गरिमा देने वाली योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया गया है। कई योजनाओं को महिलाओं को समर्पित किया गया है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति – जीवायएएन को साथ लेकर चलने का मार्ग दिखाया है। इस मार्ग पर चलते हुए मध्यप्रदेश सफलताओं की नई ऊंचाइयों पर पहुँचता जा रहा है। मातृ शक्ति को समर्पित योजनाओं और नीतियों ने प्रदेश के विकास परिदृश्य को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया है। कई क्षेत्रों में महिलाएं अपनी प्रतिभा के बल पर पुरूषों से आगे निकल गई हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयासों से महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए आज प्रदेश में अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। बेटियों के जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिख रहा है। महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे आवश्यक है उन्हें हर क्षेत्र में अवसर की समानता देना – शिक्षा, रोजगार, राजनीति, हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी होना चाहिए। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण है और पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत भागीदारी है। आर्थिक गतिविधियों और उद्यमिता में महिलाओ के स्व सहायता समूहों को जिस प्रकार सरकार ने आगे बढ़कर सहयोग किया है और नेतृत्व का अवसर दिया उसके आश्चर्यजनक और सुखद परिणाम हमें मिलते जा रहे हैं।
अनूठी योजनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में हम प्रधानमंत्री श्री मोदी के विचारों को आत्मसात करते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। महिलाओं के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य से देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन प्रारंभ किया है। लाड़ली बहना योजना में बहनों को 1,500 रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। शुरूआत से अब तक 1 करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों को 54 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना एवं गैर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में कनेक्शनधारी पात्र लाड़ली बहनों के लिए 450 रुपये में गैस रीफिल की जा रही है। गैस सिलेंडर की रीफिलिंग के लिए अब तक 11 हजार 80 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है।
डबल इंजन सरकार का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश में स्पष्ट दिख रहा है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, लाडली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, सेनिटेशन एवं हाईजीन योजना, मिशन वात्सल्य योजना, सुमन सखी चैटबॉट, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी नवाचारी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं आगे बढ़ने के लिये प्रेरित हो रही हैं।
महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मध्यप्रदेश में शांतिपूर्वक उदयमिता क्रांति की शुरूआत हुई है। अब तक महिला स्व-सहायता समूहों को 10,560 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। इसका परिणाम यह रहा कि 5 लाख स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख ग्रामीण बहनें आत्मनिर्भर बन गईं। वे निचले स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
