राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को वर्ष 2024-25 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत आयोग के संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप यह रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें अनुसूचित जातियों (SC) के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की विस्तृत समीक्षा शामिल है।
साथ ही, आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर अनुसूचित जातियों के संरक्षण और कल्याण के लिए आवश्यक सिफारिशें भी प्रस्तुत की हैं।
किशोर मकवाना के नेतृत्व में मिला प्रतिनिधिमंडल
एनसीएससी के अध्यक्ष किशोर मकवाना के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर यह रिपोर्ट सौंपी। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य:
- लव कुश कुमार (सदस्य, NCSC)
- वड्डेपल्ली रामचंदर (सदस्य, NCSC)
- डॉ. पार्थ बिस्वास (सदस्य, NCSC)
- गुडे श्रीनिवास (सचिव, NCSC)
संस्थागत तंत्र को मजबूत करने का राष्ट्रपति का आह्वान
रिपोर्ट स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आयोग से आग्रह किया कि वह अनुसूचित जातियों के संवैधानिक सुरक्षा उपायों और कल्याणकारी योजनाओं के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्रों को मजबूत और सुव्यवस्थित करने के उपाय तैयार करे। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सुचारू संस्थागत व्यवस्था ही वंचित वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रिपोर्ट की प्रमुख बातें और सिफारिशें
- व्यापक समीक्षा: वार्षिक रिपोर्ट में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं, आयोग द्वारा किए गए ऑन-ग्राउंड दौरों और परामर्शों से प्राप्त निष्कर्षों का लेखा-जोखा शामिल है।
- भविष्य की रणनीति: रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य मौजूदा व्यवस्थाओं की कमियों की पहचान करना और उन क्षेत्रों को उजागर करना है, जहाँ सुरक्षा और कल्याणकारी उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
