पूर्णिया एयरपोर्ट पर केक कटिंग का आयोजन कर एक बड़ी उपलब्धि का जश्न मनाया गया। यह खुशी का अवसर इसलिए था क्योंकि पूर्णिया एयरपोर्ट ने बेहद कम समय में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसे पाने में कई बड़े एयरपोर्ट्स को वर्षों लग जाते हैं। सीमांचल और कोसी क्षेत्र को लंबे समय तक बिहार का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता रहा है, लेकिन राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और “चप्पल पहनने वाला भी हवाई यात्रा करेगा” की सोच को पूर्णिया एयरपोर्ट ने साकार कर दिखाया है।
महज तीन महीनों की अवधि में पूर्णिया एयरपोर्ट से 50 हजार से अधिक यात्रियों ने हवाई यात्रा की है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि पूर्णिया एयरपोर्ट के निदेशक श्री दीपक प्रकाश गुप्ता ने की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एयरपोर्ट पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आने वाले समय में इसे विस्तारित और आधुनिक स्वरूप देने की योजना पर काम किया जा रहा है।
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार नए वर्ष में पूर्णिया से मुंबई, गुवाहाटी और बेंगलुरु के लिए भी उड़ान सेवाएं शुरू होने की प्रबल संभावना है, जिससे सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों को देश के प्रमुख महानगरों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
यात्री ट्रैफिक के आंकड़े भी पूर्णिया एयरपोर्ट की सफलता की कहानी बयां करते हैं। सितंबर महीने में जहां 2,718 यात्रियों ने सफर किया, वहीं अक्टूबर में यह संख्या बढ़कर 11,337 हो गई। नवंबर में 30,094 यात्रियों ने हवाई यात्रा की, जबकि दिसंबर में 12 तारीख तक ही 9,127 यात्री पूर्णिया एयरपोर्ट से आना-जाना कर चुके हैं।
पूर्णिया एयरपोर्ट से सफर करने वाले शुरुआती यात्रियों का कहना है कि मात्र तीन महीनों में करीब 55 हजार यात्रियों का आवागमन यह साबित करता है कि यह एयरपोर्ट इस क्षेत्र के लिए कितनी बड़ी जरूरत था। यात्रियों ने मांग की कि पूर्णिया से अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी उड़ान सेवाएं जल्द शुरू की जाएं। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि एयरलाइन कंपनियों को पूर्णिया एयरपोर्ट से किसी तरह का आर्थिक नुकसान नहीं होगा।
कभी इतिहास के पन्नों में पूर्णिया को ‘काला पानी’ की सजा के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ तस्वीर बदल गई है। सरकार के प्रयासों से आज पूर्णिया विकास के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और बिहार में अपनी एक नई पहचान बना रहा है। बैलगाड़ी से शुरू हुआ यह सफर अब हवाई जहाज तक पहुँच चुका है।
