रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य विषय प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) की भूमिका, दायित्व और भविष्य की कार्यक्षमता को मजबूत बनाने पर केंद्रित रहा।
बैठक के दौरान रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रादेशिक सेना के दायित्वों, कार्यों और प्रमुख उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी। समिति के सदस्यों ने भी सेना को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इसके सदस्य अपने सामान्य नागरिक जीवन और पेशेवर कार्यों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर वर्दी पहनकर देश की सीमाओं की रक्षा तथा आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रादेशिक सेना में वर्तमान में लगभग 44 हजार 400 जवान कार्यरत हैं, जो 59 विभिन्न इकाइयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यह बल त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात तथा हाल ही में असम में आई बाढ़ के दौरान राहत, बचाव और चिकित्सा सहायता प्रदान करने में प्रादेशिक सेना के योगदान की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना देश की सशस्त्र सेनाओं के लिए प्रशिक्षित सैनिकों का एक मजबूत रिजर्व तैयार करती है, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर तत्काल तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि पूरी कर नागरिक जीवन में लौटने वाले सैनिक समाज और सेना के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करते हैं तथा विशेष रूप से युवाओं को देश की रक्षा सेवाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
