पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के पहले चरण में लोकतंत्र की एक शानदार और उत्साही तस्वीर देखने को मिली। इन दोनों राज्यों में मतदाताओं ने अपनी भागीदारी से वोटिंग के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92.72 प्रतिशत और तमिलनाडु में 85.14 प्रतिशत का अभूतपूर्व मतदान दर्ज किया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार ने इस भारी मतदान को ऐतिहासिक बताते हुए स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में हुआ यह मतदान आजादी के बाद से राज्य में अब तक का ‘सबसे अधिक प्रतिशत’ है। चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए चुनाव आयोग ने पूरी सतर्कता बरती। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी ने लाइव वेबकास्टिंग के जरिए मतदान पर कड़ी नजर रखी, जिसे दोनों राज्यों के सभी मतदान केंद्रों पर अनिवार्य रूप से लागू किया गया था।
पश्चिम बंगाल की चुनावी तस्वीर पर गौर करें तो, राज्य की 294 सीटों में से पहले चरण में 152 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ। वहीं, तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए एक ही चरण में चुनाव संपन्न कराया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भारी मतदान को ‘बदलाव के लिए जबरदस्त जनादेश’ करार दिया है। उन्होंने टीएमसी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 4 मई को जब चुनावी नतीजे आएंगे, तो वह टीएमसी के 15 साल पुराने ‘सिंडिकेट सिस्टम’ और ‘महा जंगल राज’ की समाप्ति (एक्सपायरी) की तारीख साबित होगी। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी चुनावी गतिविधियों के केंद्र में रहे। वे पश्चिम बंगाल में ही डेरा डाले हुए हैं और उन्होंने मतदान के दौरान साल्ट लेक स्थित भाजपा के चुनाव कंट्रोल रूम का दौरा किया, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ जमीनी स्थिति की समीक्षा की।
चुनावी कार्यक्रम के अगले पड़ाव की बात करें तो, पश्चिम बंगाल में बाकी बची 142 सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है। वर्तमान में केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी (एक केंद्र शासित प्रदेश) में चुनावी प्रक्रिया चल रही है। इन सभी चार राज्यों और पुडुचेरी में डाले गए वोटों की गिनती 4 मई को एक साथ की जाएगी।
