नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विकासशील देशों की वास्तविकताओं के अनुरूप जन-केंद्रित और कार्यान्वयन-उन्मुख पर्यावरणीय कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स देश ज्ञान साझाकरण, तकनीकी सहयोग और मजबूत संस्थागत साझेदारी के माध्यम से अपनी क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। यह बैठक सर्वसम्मति से एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य और चार ज्ञान संकलनों को अपनाने के साथ संपन्न हुई।
वैश्विक दक्षिण और विकासशील देशों की चुनौतियां
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से निर्देशित है, जिसमें ‘ग्लोबल साउथ’ और विकासशील देशों की चिंताओं को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता क्षय, प्रदूषण और आपदा जोखिमों का उल्लेख करते हुए जंगलों की आग (फॉरेस्ट फायर) की रोकथाम, पूर्व चेतावनी और आग के बाद पुनर्बहाली के लिए मजबूत सहयोग पर जोर दिया।
पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन और भारत की प्रतिबद्धता
बैठक में यह रेखांकित किया गया कि पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन और मानव विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। इसके उदाहरण के रूप में ‘मिशन लाइफ’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों का जिक्र किया गया, जो जनभागीदारी को बढ़ावा देती हैं। मंत्री ने 2031-2035 के लिए भारत के नए राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) का उल्लेख करते हुए समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की चार प्रमुख प्राथमिकताएं:
- संवहनीय जीवनशैली: पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना।
- वनरोपण एवं वन अग्नि प्रबंधन: आपदा से निपटने और वनों की सुरक्षा की क्षमता बढ़ाना।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy): संसाधनों के पुनर्चक्रण और टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहन।
- अनुकूलन (Adaptation): स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाकर जलवायु अनुकूलन को लागू करना।
संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य के चार मुख्य परिणाम:
- संवहनीय जीवनशैली नेटवर्क: ज्ञान साझाकरण, अनुसंधान और नवाचार के लिए ब्रिक्स संस्थानों का नेटवर्क स्थापित करना।
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के सिद्धांत: मरुस्थलीकरण से निपटने और संवहनीय भूमि प्रबंधन के लिए एकीकृत सिद्धांत।
- वन अग्नि प्रबंधन: वनों में आग की घटनाओं से निपटने की तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया पर आम सहमति।
- जलवायु अनुकूलन के सिद्धांत: पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित अनुकूलन रणनीति।
समारोह के मुख्य आकर्षण
बैठक के दौरान ‘जलवायु परिवर्तन पर उच्च स्तरीय संवाद’ और ‘एकीकृत भूदृश्य-आधारित हरियाली’ पर अनुभव साझा किए गए। इसके अलावा, पर्यावरण मंत्रालय द्वारा स्थापित डिजिटल और इंटरैक्टिव ‘मिशन लाइफ पवेलियन’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां इमर्सिव गेमिंग के माध्यम से भारत की पर्यावरणीय पहलों को प्रदर्शित किया गया।
