प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज से शुरू हो रही स्वीडन के गोटेबर्ग शहर की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा नई दिल्ली और स्टॉकहोम के बीच गहराते रणनीतिक और आर्थिक गठजोड़ में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। स्वीडन के प्रधानमंत्री महामहिम उल्फ क्रिस्टरसन के विशेष निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के व्यापक यूरोपीय दौरे का तीसरा पड़ाव है। इस वर्ष की शुरुआत में ऐतिहासिक ‘भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता’ (India-EU FTA) लागू होने के बाद यूरोपीय महाद्वीप की यह उनकी पहली यात्रा है, जो इस द्विपक्षीय जुड़ाव को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
स्वीडन के औद्योगिक और नवाचार केंद्र गोटेबर्ग की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करना और तीव्र तकनीकी बदलावों व जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों के इस दौर में सहयोग के नए रास्ते तलाशना है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग के दौर में हो रही है, जहां वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि वर्ष 2000 से 2025 के बीच भारत में स्वीडिश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कुल 2.825 अरब डॉलर रहा है।
इस मजबूत जुड़ाव की नींव प्रधानमंत्री मोदी की 2018 की स्टॉकहोम यात्रा के दौरान रखी गई थी, जो तीन दशकों से अधिक समय में किसी भारतीय नेता की पहली स्वीडन यात्रा थी। उसी वर्ष प्रथम भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी की गई थी, जिसने स्वीडन को व्यापक नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव के प्राथमिक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया। तब से दोनों देशों के संबंध महज एक खरीदार-विक्रेता के दायरे से बाहर निकलकर गहरे औद्योगिक एकीकरण और सह-विकास की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
नवाचार, हरित संक्रमण और भारत-EU FTA के लाभ:
- इनोवेशन और लीडआईटी (LeadIT) पहल: नवाचार और प्रौद्योगिकी इस आधुनिक रिश्ते की आधारशिला हैं। स्वीडन की गिनती दुनिया की सबसे इनोवेटिव अर्थव्यवस्थाओं में होती है, जो भारत के विशाल डिजिटल टैलेंट पूल और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ मिलकर “परफेक्ट कॉम्प्लीमेंटैरिटी” (उत्कृष्ट पूरकता) बनाती है। दोनों देशों ने भारी उद्योगों को कम कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए 2019 में ‘लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन’ (LeadIT) की शुरुआत की थी। इसके बाद COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने मिलकर ‘LeadIT 2.0’ को लॉन्च किया, जो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और तकनीकी सहायता जुटाने पर केंद्रित है।
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से आर्थिक बढ़ावा: वर्ष 2026 की इस यात्रा के आर्थिक लक्ष्यों को भारत-EU FTA के क्रियान्वयन से बड़ा समर्थन मिल रहा है। इस रणनीतिक समझौते से भारतीय बाजार को अभूतपूर्व पहुंच मिलने की उम्मीद है, जिससे कपड़ा, चमड़ा और इंजीनियरिंग सामान जैसे भारत के श्रम-प्रधान निर्यात में भारी उछाल आएगा। वहीं, स्वीडन के लिए यह एफटीए अन्य देशों पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक विकास के लिए एक नियम-आधारित ढांचा तैयार करने का माध्यम है।
- यूरोपीय गोलमेज सम्मेलन को संबोधन: गोटेबर्ग यात्रा का एक अनूठा आकर्षण दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में ‘यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ (अग्रणी यूरोपीय व्यापारिक नेताओं का मंच) को संयुक्त रूप से संबोधित करना होगा। यह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करता है।
रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नया सहयोग:
रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी इस द्विपक्षीय साझेदारी के एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में उभरा है, जो अब औद्योगिक सहयोग और “मेक इन इंडिया” (MII) कार्यक्रम को मजबूत कर रहा है। इसी बढ़ते भरोसे के तहत स्वीडन की एक अग्रणी रक्षा कंपनी ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत भारत में अपनी पहली पूर्ण स्वामित्व वाली विनिर्माण इकाई स्थापित की है। यह निवेश न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत में स्थानीय रोजगार और औद्योगिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने वाला भी है।
पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर दोनों देश अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं। स्वीडन आधिकारिक तौर पर भारत के ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ (शुक्र मिशन) में शामिल हो रहा है और इस मिशन के लिए ऊर्जावान तटस्थ परमाणु विश्लेषण (Energetic Neutral Atom Analysis) से जुड़े उन्नत वैज्ञानिक उपकरण प्रदान कर रहा है। यह वैज्ञानिक साझेदारी उच्च तकनीक अनुसंधान और बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
निष्कर्ष के तौर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गोटेबर्ग यात्रा ऐतिहासिक विश्वास को भविष्य की आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ने वाला एक परिवर्तनकारी क्षण है। ग्रीन ट्रांजिशन, एआई (AI), लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करके भारत और स्वीडन न केवल अपनी विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर उत्तर-दक्षिण सहयोग (North-South Cooperation) का एक उत्कृष्ट मॉडल भी पेश कर रहे हैं।
