प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व योगासन चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ियों से अपने-अपने देशों में लौटने के बाद आयुष मंत्रालय के ‘योग 365’ अभियान के वैश्विक राजदूत बनने का आह्वान किया है। अहमदाबाद में आयोजित चैम्पियनशिप के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष मंत्रालय ने पूरे वर्ष योग के प्रति लोगों की भागीदारी बनाए रखने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘योग 365’ अभियान शुरू किया है।
प्रधानमंत्री ने दुनिया भर से आए खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद भी योग के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाएं और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहतर स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक माध्यम भी है।
अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैम्पियनशिप में 60 से अधिक देशों के 400 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। 4 जून से 8 जून तक चलने वाले इस आयोजन को योगासन को एक संरचित अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल खेल प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि दुनिया भर में योग के व्यापक संदेश को पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने कहा कि योग मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित करता है तथा इसकी स्वीकार्यता लगातार वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है।
आयुष मंत्रालय लंबे समय से देश और विदेश में योग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों का संचालन कर रहा है। विश्व योगासन चैम्पियनशिप को भी मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। इसके साथ ही खेल प्राधिकरणों और विभिन्न आयोजन संस्थाओं ने भी योगासन को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए सहयोग दिया है।
सरकार का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन योग को नई पहचान देने के साथ-साथ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को विश्व समुदाय तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विश्व योगासन चैम्पियनशिप के माध्यम से योग को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में विकसित करने और युवाओं को इससे जोड़ने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
