प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बहुदेशीय यात्रा के हिस्से के रूप में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच गए हैं। यह दौरा भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय वार्ता के साथ-साथ तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का ओस्लो का यह पहला दौरा है और इसके साथ ही यह पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली आधिकारिक यात्रा भी बन गई है। इस यात्रा से भारत और नॉर्डिक देशों के संबंधों को एक नई और मजबूत दिशा मिलने की उम्मीद है।
अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी वहां के महाराजा किंग हेराल्ड पंचम और महारानी क्वीन सोन्जा से शिष्टाचार भेंट करेंगे। इसके अलावा वह नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टारे के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता का नेतृत्व भी करेंगे। प्रधानमंत्री का भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। इस पूरे दौरे का मुख्य फोकस मुख्य रूप से क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी और ब्लू इकोनॉमी जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर केंद्रित रहने वाला है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसरों को भारी गति मिलेगी।
अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। हाल ही में लागू हुए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के आलोक में यह शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के साथ आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने में उत्प्रेरक का काम करेगा। वर्तमान में भारत और पांच नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 19 अरब डॉलर का है। इस बार की बातचीत में नवाचार, रक्षा, आर्कटिक क्षेत्र और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ाने जैसे व्यापक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह दौरा नॉर्डिक देशों के साथ भारत के पहले से ही सौहार्दपूर्ण और मजबूत रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
