विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत International Advanced Research Centre for Powder Metallurgy and New Materials यानी ARCI के वैज्ञानिकों ने स्वच्छ ऊर्जा भंडारण के लिए एक किफायती और उच्च क्षमता वाला थर्मल बैटरी मटेरियल विकसित किया है। यह नई तकनीक केंद्रित सौर ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक अपशिष्ट ऊष्मा पुनर्प्राप्ति प्रणालियों में ऊर्जा भंडारण की क्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लंबे समय से ऐसे मटेरियल पर शोध किया जा रहा था जिनमें अधिक तापीय क्षमता, बेहतर तापीय चालकता और उच्च तापमान को सहन करने की क्षमता हो। इसी दिशा में ARCI की शोध टीम ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिक मणि कार्तिक के नेतृत्व में टीम ने स्पिनेल नैनो-कॉम्पोजिट फेज चेंज मटेरियल यानी PCM तैयार करने की सरल और कम लागत वाली प्रक्रिया विकसित की है।
इस तकनीक में को-प्रेसिपिटेशन प्रक्रिया के माध्यम से नियंत्रित आकार वाले स्पिनेल प्रकार के मेटल ऑक्साइड नैनो-पार्टिकल तैयार किए गए। शोधकर्ताओं के अनुसार PCM में केवल 1 प्रतिशत स्पिनेल ऑक्साइड नैनो-पार्टिकल मिलाने से इसकी विशिष्ट ऊष्मा क्षमता में लगभग 45 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि यह मटेरियल कम जगह में अधिक तापीय ऊर्जा संग्रहित करने में सक्षम होगा, जिससे ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की कार्यक्षमता काफी बढ़ सकती है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि जब ये नैनो-पार्टिकल PCM में समान रूप से फैलते हैं, तो वे उसकी सतह ऊर्जा और तापीय गुणों को बेहतर बनाते हैं। इससे छोटे और अधिक कॉम्पैक्ट ऊर्जा भंडारण टैंक तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें निर्माण सामग्री और परिचालन लागत दोनों कम होती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में कम लागत वाली, उच्च क्षमता और कॉम्पैक्ट थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास का आधार बन सकती है।
यह महत्वपूर्ण शोध प्रतिष्ठित जर्नल Materials Today Chemistry में प्रकाशित हुआ है। सरकारी बयान के अनुसार यह उपलब्धि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
