भारत ने आज हरित और टिकाऊ गतिशीलता (सस्टेनेबल मोबिलिटी) की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चलाई गई है। इस शुरुआत के साथ ही जींद का नाम भारत के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार: दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने हरियाणा में 12,470 करोड़ रुपये से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। पीएम मोदी ने 157 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-康त्र एक्सप्रेसवे खंड को राष्ट्र को समर्पित किया।
- यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर कुल 667 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का हिस्सा है।
- इस एक्सप्रेसवे के बनने से दिल्ली और कटरा के बीच यात्रा का समय 14 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा।
- वहीं, दिल्ली से अमृतसर का सफर भी 8 घंटे से घटकर केवल 4 घंटे का हो जाएगा।
21वीं सदी की भारतीय रेलवे: हाइड्रोजन तकनीक
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय रेलवे में अभूतपूर्व बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा कि आज जींद भाजपा और एनडीए के सुशासन मॉडल का प्रतीक बनकर उभर रहा है। भविष्य की रेल यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की रेलवे हाइड्रोजन तकनीक से संचालित होगी।
“दुनिया में केवल तीन से चार देशों के पास ही हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की क्षमता है। भारत की यह हाइड्रोजन ट्रेन 3,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
यह ट्रेन फिलहाल जींद-सोनीपत रूट पर लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जिसका भविष्य में और विस्तार किया जाएगा।
पूरी तरह स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस लॉन्च को देश की तकनीकी प्रगति में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह ट्रेन पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल है, जिसमें डीजल या पेट्रोल की कोई आवश्यकता नहीं है।
रेल मंत्री ने हरियाणा में निवेश का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य का रेलवे बजट पहले के 315 करोड़ रुपये से बढ़ाकर अब करीब 3,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वर्तमान में राज्य में करीब 18,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं चल रही हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत की बड़ी छलांग
इस ट्रेन को पूरी तरह भारत में ही डिजाइन, इंजीनियर और तैयार (इंटीग्रेट) किया गया है।
- रफ्तार: जींद-सोनीपत सेक्शन पर इसकी परिचालन गति 75 किमी/घंटा और डिजाइन गति 110 किमी/घंटा है।
- क्षमता: जहां जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में चल रही हाइड्रोजन ट्रेनें महज 2 या 3 कोच की हैं, वहीं भारतीय रेलवे की यह ट्रेन 10 कोच वाली है, जिसमें 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं।
कैसे काम करती है यह ट्रेन?
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है, जो हाइड्रोजन को बिजली में बदलती है। इस प्रक्रिया में बाई-प्रोडक्ट (उपोत्पाद) के रूप में केवल पानी की भाप (वाटर वेपर) निकलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। सुरक्षा के लिहाज से इसमें मल्टी-लेयर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया है जो हाइड्रोजन लीक, गर्मी, आग और धुएं का तुरंत पता लगा सकता है। ट्रेन के संचालन के लिए जींद में एक विशेष हाइड्रोजन सुविधा केंद्र भी स्थापित किया गया है।
भारतीय रेलवे अब इस अनुभव के आधार पर कालका-शिमला जैसे हेरिटेज रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
