नई दिल्ली: संसद ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया है। लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा ने भी इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। दोपहर के भोजन के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को चर्चा के लिए पेश किया। सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने बताया कि इस विधेयक पर चर्चा के लिए सात घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान:
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कड़े दंड का प्रावधान: दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और दोषियों की संपत्ति जब्त करने का कड़ा प्रावधान है।
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समयबद्ध जांच और सुनवाई: मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश को दैनिक सुनवाई हेतु विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Courts) स्थापित करने होंगे।
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तय सीमा: पुलिस स्टेशन में सूचना दर्ज होने की तारीख से 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। वहीं, आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करना अनिवार्य होगा।
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विशेष कार्यबल: मामलों की प्रभावी जांच के लिए विशेष कार्यबल (Special Task Force) गठित करने का प्रावधान भी शामिल है।
सरकार का पक्ष:
चर्चा का जवाब देते हुए राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुद्दा देश के हर नागरिक और युवा से जुड़ा है। उन्होंने पेपर लीक रोकने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया।
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युवाओं और शिक्षा पर जोर: डॉ. सिंह ने कहा कि युवा ‘विकसित भारत’ की सबसे बड़ी पूंजी हैं। पिछले एक दशक में एम्स (AIIMS) अस्पतालों की संख्या 7 से बढ़कर 22 हो गई है और मेडिकल सीटों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।
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NEP 2020 की भूमिका: उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि इसने 12वीं के छात्रों को माता-पिता द्वारा चुने गए विषयों की मजबूरी से आजाद किया है।
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जीरो टॉलरेंस नीति: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पेपर लीक और धांधली के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।
हालांकि, मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।
बहस में नेताओं की प्रतिक्रियाएं:
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मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस): विपक्ष के नेता ने कहा कि विधेयक में केवल सतही बदलाव किए गए हैं और ये संशोधन धांधली रोकने में नाकाफी हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध और संस्थागत विफलताओं के बाद ही सरकार ने यह कदम उठाया है।
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बृजलाल (भाजपा): उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और स्पेशल टास्क फोर्स के प्रावधानों से सरकार की नीयत साफ दिखाई देती है।
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तिरुचि शिवा (DMK) और रामगोपाल यादव (सपा): दोनों नेताओं ने केवल सजा बढ़ाने को नाकाफी बताया और ‘नीट’ (NEET) परीक्षा को समाप्त कर राज्यों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने का अधिकार देने की मांग की।
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संजय सिंह (आप): उन्होंने फास्ट-ट्रैक अदालतों में पहले से लंबित मामलों की संख्या और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया।
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सुधांशु त्रिवेदी (भाजपा): उन्होंने नीट परीक्षा का बचाव करते हुए कहा कि इसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को समान अवसर प्रदान किए हैं।
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मुकुल वासनिक (कांग्रेस): उन्होंने तर्क दिया कि केवल सजा या जुर्माना बढ़ाने से परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता नहीं आ सकती।
इसके अलावा प्रफुल्ल पटेल (एनसीपी), संजय कुमार झा (जदयू), सागरिका घोष (टीएमसी), एम थंबीदुरई (अन्नाद्रमुक), मनोज झा (राजद), जॉन ब्रिटास (माकपा) और केंद्रीय मंत्री रामदास अठवाले सहित अन्य सांसदों ने भी चर्चा में भाग लिया।
विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
