संसद ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। इस विधेयक के माध्यम से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है। अब वंदे मातरम् के अपमान को भी राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान होगा।
लोकसभा में चर्चा का उत्तर देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक केवल कानूनी संशोधन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को सशक्त बनाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रगान के सम्मान की रक्षा के प्रावधान किए गए थे और अब उसी भावना के अनुरूप वंदे मातरम् को भी समान कानूनी संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा की आवाज है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने अनगिनत सेनानियों को प्रेरित किया। नित्यानंद राय ने बताया कि 15 अगस्त 1947 की सुबह सरदार वल्लभभाई पटेल के आग्रह पर पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने आकाशवाणी से पूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया था, जिसने स्वतंत्र भारत के पहले प्रभात का स्वागत किया।
विधेयक पर चर्चा के दौरान डीएमके सांसद के. कनिमोझी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह कानून देश में लोगों के बीच विभाजन पैदा कर सकता है।
वहीं भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पिछले वर्ष नवंबर से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में वर्षभर का राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से वंदे मातरम् को वह कानूनी संरक्षण मिल रहा है, जिसका लंबे समय से इंतजार था।
संबित पात्रा ने यह भी कहा कि संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आश्वासन दिया था कि ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ दोनों को समान सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने वंदे मातरम् को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया।
विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
