भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार करते हुए देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन (Clean Energy Transition) का प्रमुख आधार बन गया है। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ (PM-SSY) को अपनी मंजूरी प्रदान की है।
इस योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Battery Energy Storage Systems) के सहयोग से 5,000 मेगावाट क्षमता वाली फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (Floating Solar PV) परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
एक दशक में 50 गुना से अधिक बढ़ी क्षमता
भारत ने पिछले 12 वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है:
- 2014 से 2026 तक का सफर: वर्ष 2014 में भारत की स्थापित सौर क्षमता मात्र 3 गीगावाट (GW) थी, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 162.15 गीगावाट पर पहुंच चुकी है।
- वर्ष 2025 का रिकॉर्ड: वर्ष 2025 में भारत ने 37 गीगावाट नई सौर क्षमता जोड़ी, जिससे वार्षिक वृद्धि के मामले में वह अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर विकास बाजार बन गया।
- वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन: केवल FY2025-26 में रिकॉर्ड 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी गई।
PM-SSY: ₹5,070 करोड़ के बजट से फ्लोटिंग सोलर को बढ़ावा
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना की प्रमुख विशेषताएं:
- बजट व समय सीमा: योजना का अनुमानित बजट ₹5,070 करोड़ है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा।
- भंडारण क्षमता (Energy Storage): पीक डिमांड (अत्यधिक बिजली मांग) के प्रबंधन के लिए कम से कम 2 घंटे की अवधि वाली 10,000 मेगावाट भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी।
- भूमि की बचत: जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग होने से भूमि संसाधनों पर दबाव कम होगा।
- पर्यावरण व रोजगार: इससे सालाना 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी और 16,000 से 17,000 नए रोजगार पैदा होंगे।
- विशाल संभावना: राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के अनुसार भारत के अंतर्देशीय जल निकायों में 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर की संभावना मौजूद है।
घरेलू विनिर्माण और सरकारी नीतियां
- मैन्युफैक्चरिंग में उछाल: सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2014 के 2.3 GW से बढ़कर मार्च 2026 तक 172 गीगावाट हो गई है।
- PLI योजना: हाई-एफिशिएंसी सौर मॉड्यूल के लिए PLI योजना से अक्टूबर 2024 तक ₹35,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ।
- ALMM ढांचा: गुणवत्ता और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं की सूची’ (ALMM) व्यवस्था लागू है।
- कम लागत: 2025 में भारत में यूटिलिटी-स्केल सौर पीवी की लागत (LCOE) $35 प्रति मेगावाट-घंटा रही, जो वैश्विक औसत ($44) से काफी सस्ती है।
जन-भागीदारी: रूफटॉप और पीएम-कुसुम का योगदान
सौर ऊर्जा का विस्तार अब केवल बड़े पावर प्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि घरों और खेतों तक पहुंच चुका है:
- पीएम सूर्य घर (मुफ्त बिजली योजना): ₹75,021 करोड़ के बजट वाली इस योजना से जून 2026 तक 43 लाख परिवारों को सौरीकृत किया जा चुका है। दिसंबर 2025 तक 7.7 लाख से अधिक परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया।
- पीएम-कुसुम (PM-KUSUM): कृषि क्षेत्र के लिए शुरू की गई इस योजना से 21.77 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। इसके तहत 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप और 15.89 लाख कृषि पंपों का सौरीकरण किया गया है।
- वितरित सौर (Distributed Solar): FY2025-26 में जोड़ी गई कुल सौर क्षमता में 36% योगदान (16.3 GW) रूफटॉप और पीएम-कुसुम का रहा।
वैश्विक नेतृत्व और 2030 का लक्ष्य
भारत अपने पंचामृत लक्ष्यों के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-जीरो (Net-Zero) बनने की दिशा में काम कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और OSOWOG (वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड) जैसी अंतरराष्ट्रीय पहलों के जरिए भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) और दुनिया को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का रास्ता दिखा रहा है।
