मजबूत आर्थिक संकेतकों, बेहतर औद्योगिक गतिविधियों और निर्यात में सुधार के दम पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था के लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। यह अनुमान शुरुआती उम्मीदों से कहीं अधिक है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) से पहले जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वृद्धि का यह नया अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पिछले अनुमानों से बेहतर है। रिजर्व बैंक ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अपने अनुमान घटा दिए थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान प्रमुख आर्थिक संकेतकों में चौतरफा सुधार देखा गया है:
- पैसेंजर व्हीकल बिक्री: जून में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 24.1% की वृद्धि दर्ज की गई।
- बिजली की मांग: इस अवधि में बिजली की मांग में 11.5% का उछाल आया।
- निर्यात (Exports): भारत के निर्यात में 15.5% की बढ़ोतरी हुई।
- इंडस्ट्रियल क्रेडिट: औद्योगिक ऋण आवंटन में 19.2% का विस्तार देखा गया।
- आईआईपी (IIP): औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 7.3% की दर से बढ़ा, जो मजबूत आर्थिक रफ्तार का स्पष्ट संकेत देता है।
एसबीआई रिसर्च ने यह भी रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भले ही वैश्विक माहौल अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था ने काफी मजबूती और लचीलापन दिखाया है।
मानसून से और उम्मीदें:
रिपोर्ट के मुताबिक, मानसूनी स्थितियों में आए सुधार से आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों को और सहारा मिल सकता है। जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने देशभर में बारिश की कमी को घटाकर लगभग 13% कर दिया है। इसके अलावा, जलाशयों का जलस्तर सामान्य हो गया है और खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के स्तर से केवल 4.7% पीछे है, जो बेहतर पैदावार की ओर इशारा करती है।
