जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटजी प्रमुख क्रिस्टोफर वुड ने भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को लेकर अपना सकारात्मक दृष्टिकोण दोहराया है। उन्होंने कहा कि देश की मजबूत होती आर्थिक स्थिति, बैंक ऋण में तेज वृद्धि और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की वापसी भारत को उभरते बाजारों में सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में बनाए हुए है। इसी भरोसे के चलते उन्होंने अपने भारत-केंद्रित इक्विटी पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं।
जुलाई में विदेशी निवेशकों की मजबूत वापसी
अपने ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ नोट में क्रिस्टोफर वुड ने बताया कि जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार रहे। इस दौरान उन्होंने करीब 2.45 अरब डॉलर का निवेश किया। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक तकनीकी क्षेत्र से जुड़े मेमोरी ट्रेड में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं।
आर्थिक संकेतकों ने बढ़ाया भरोसा
वुड के अनुसार, भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति अन्य उभरते बाजारों की तुलना में उसे अलग पहचान दिला रही है। वर्ष 2026 में बैंक ऋण वृद्धि की दर सालाना आधार पर 17 से 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय की सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है।
उन्होंने बताया कि कॉरपोरेट क्षेत्र को मिलने वाला ऋण इस बढ़ोतरी का प्रमुख आधार बना हुआ है, जिसमें लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कृषि क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण में 17 प्रतिशत और खुदरा ऋण में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल और आवासीय संपत्तियों की मांग भी मजबूत बनी हुई है।
रुपए को मिलेगा अतिरिक्त समर्थन
क्रिस्टोफर वुड ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जून में शुरू की गई गैर-निवासी भारतीयों के लिए विदेशी मुद्रा जमा योजना को अब तक लगभग 41 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हो चुका है। उनका अनुमान है कि अगले दो महीनों में यह आंकड़ा 80 से 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश से मिलने वाले ब्याज पर विदेशी निवेशकों को कर छूट देने के सरकार के फैसले से भी विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। इन कदमों से भारतीय रुपया अधिक स्थिर हो सकता है। जेफरीज ने अपने वैश्विक सरकारी बॉन्ड पोर्टफोलियो में भारतीय सरकारी बॉन्ड को लेकर भी सकारात्मक रुख बनाए रखा है।
